उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में दुगड्डा ब्लाक के ग्रामीण जंगली जानवरों के खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। आए दिन गुलदार गौशाला में बंधे जानवरों को मार रहा है। रात को वह घर के आंगन में टहल रहा है। खेत में उगी फसल को सुअर चट कर रहा है।
वन विभाग अनजान
क्यारियों में उगी सब्जी को बंदर नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में लोगों का जीना मुहाल है। गुलदार के आतंक से लोग शाम ढलते ही घरों के अंदर दुबकने को मजबूर हैं। जंगली जानवरों से नागरिकों की सुरक्षा के दावे भरने वाला वन विभाग अनजान बना हुआ है। जिसके कारण लोगों में आतंक व्याप्त है।
परेशानी लोगों की जुबानी
स्थानीय नागरिक महिपाल सिंह असवाल, दिनेश सिंह, मुकेश शर्मा, विजेंद्र सिंह नेगी, त्रिलोक सिंह ने बताया कि जंगली जानवरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। गांव के आसपास जंगली सुअरों, बंदरों और गुलदार का आतंक व्याप्त है। ना हम खेती कर पा रहे हैं और ना ही मवेशी पाल पा रहे हैं। शाम ढलते ही गुलदार घर के आंगन तक धमक रहा है। वे शाम ढलते ही घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वन विभाग शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहा है।
केस एक
दिनेश सिंह और त्रिलोक सिंह सुबह अपनी गौशाला में जानवरों को घास देने के लिए गए। उन्होंने गौशाला का दरवाजा टूटा पया। अंदर जाकर देखा तो गाय की बछिया गायब थी। पास के खेत में वह मृत दिखी। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला पखवाड़ेभर से जारी है। गुलदार अभी तक छह जानवारों को अपना शिकार बना चुका है।
केस दो
महिपाल सिंह असवाल ने अपनी दस नाली भूमि पर अदरक और हल्दी की खेती की थी। सोमवार रात सुअर ने खेत में धमककर हल्दी की खेती रौंद डाली और अदरक चट कर दिया। यही हाल गेंहूं और धान की फसल का भी है।
केस तीन
मुकेश शर्मा रविवार रात को घर के आंगन में बने शौचालय में शौच के लिए जा रहे थे। अचानक उनकी नजर उनकी तरफ आ रहे गुलदार पर पड़ी, उसे देखते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने घर के अंदर भागकर किसी तरह जान बचाई।