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मां के सामने बच्चे को उठा ले गया गुलदार

Sat, 17 Jan 2015 07:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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शुक्रवार शाम करीब पौने छह बजे दस साल के बच्चे को गुलदार उठा ले गया। बच्चा शाम का खाना खाने के बाद झोपड़ी से बाहर मां के साथ हाथ धोने निकला था। इसी बीच घात लगाकर बैठे गुलदार ने बच्चे की गर्दन को दबोच लिया।
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बेटे को मौत के मुंह में देखकर मां चिल्लाई और बेहोश होकर गिर पड़ी। जब तक आसपास के लोग जुटते गुलदार जंगल में भाग गया था। काफी तलाश के बाद भी बच्चे का शव नहीं मिला, लेकिन उसका निकर घटनास्थल से करीब 50 मीटर दूरी पर मिला।

खबर लिखे जाने तक वन विभाग और पुलिस की टीम ने गुलदार की तलाश में अभियान चला रखा था। हालांकि वन और पुलिस विभाग के अधिकारियों को लोगों के गुस्से का शिकार होना भी पड़ा। जानकारी मिलते ही घटनास्थल पर मसूरी विधायक गणेश जोशी भी पहुंच गए।
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जब तक जुटे बच्चे को लेकर जंगल में पहुंचा

शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर प्रेम नगर थाना क्षेत्र (झाझरा वन क्षेत्र) के फुलसनी गांव के करीब एक झुग्गी बस्ती से गुलदार श्रमिक कर्ण सिंह, निवासी यूपी, के 10 साल के बेटे कृष्ण को उठा ले गया। बच्चे के पिता ने बताया कि कृष्ण चौथी कक्षा में पढ़ता था। घटनास्थल के पास केवल तीन झोपड़ियां हैं। इस वजह से यहां जल्दी लोग एकत्रित नहीं हो पाए।

कहा कि जब तक लोग जुटते और गुलदार का पीछा करते तब तक गुलदार जंगल में भाग चुका था। हालांकि शोर सुनने के बाद मसंदावाला, बाजावाला, फुलसनी वाला और जामनवाला के ग्रामीण टार्च एवं लाठियां लेकर घटनास्थल पहुंचे। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। लोगों ने बच्चे की तलाश की लेकिन वह नहीं मिला।

सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। टीम ने गुलदार की तलाश में अभियान शुरू किया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। प्रभागीय वनाधिकारी सुशांत पटनायक एवं उपप्रभागीय वनाधिकरी गुलबीर सिंह भी मौके पर पहुंच गए।

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों ने घेरा

लोगों के आरोपों को सही माना जाए तो वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से एक दस साल के बच्चे की जान चली गई। लोगों की शिकायतों पर यदि वन विभाग ने फुलसनी गांव में गुलदार से निपटने के पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए होते तो शुक्रवार देर शाम चौथी कक्षा में पढ़ने वाले कृष्ण की गर्दन गुलदार के मुंह में नहीं होती।

शुक्रवार शाम फुलसनी गांव से दस साल के बच्चे को गुलदार द्वारा उठा ले जाने की सूचना पर मौके पर पहुंचे वन और पुलिस विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा।

लोगों का आरोप था कि पहले भी गुलदार इस इलाके में कई बार दिख चुका है। इस बारे में पुलिस और वन विभाग में कई बार शिकायत भी की गई लेकिन लोगों की सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं किए गए।

लगेंगी सोलर लाइटें और पिंजरा
प्रभागीय वनाधिकारी सुशांत पटनायक ने बताया कि बस्ती से दूर वीरान इलाके में केवल तीन झुग्गियां बनाकर रहना खतरे से खाली नहीं है। यहां पर बिजली की भी व्यवस्था नहीं है। कहा कि हमने इलाके का दौरा कर लोगों को कुछ दिशा निर्देश जारी किए थे, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने इलाके में सोलर लाइटें और गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने के निर्देश दिए।
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कई द‌िनों से इलाके में घूम रहा गुलदार

शहर के नजदीकी गांवों में पिछले कई दिनों से गुलदार की सक्रियता बनी हुई है। आए दिन गुलदार के किसी न किसी क्षेत्र में देखे जाने की सूचना मिलती रहती है, लेकिन वन विभाग इस तरफ कोई कदम नहीं उठा रहा है।

यही वजह है कि आसपास के गांवों से एक माह में करीब दर्जन दुधारू पशु गुलदार का निवाला बन चुके हैं। यही नहीं, शहर के एकदम करीब स्थित भारतीय अनुसंधान केंद्र (एफआरआई) में एक बच्चे को हमला करके गुलदार घायल भी कर चुका है।

गत सप्ताह पुरोहितवाला गांव में गुलदार ने हमला करके एक गाय को मार दिया था। इस गांव में पिछले चार माह में गुलदार एक दर्जन के करीब दुधारू पशुओं को मार चुका है। इसके अलावा गुलदार को कई नागरिक इलाकों में देखे जाने की सूचनाएं मिलती हैं।
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