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सदन चलेगा या इस बार भी होगा तमाशा!

Wed, 18 Sep 2013 10:13 AM IST
अमर उजाला, धीरेंद्र नाथ पांडे, देहरादून
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उत्तराखंड में आई विकराल आपदा के बाद बुधवार को पहली बार पक्ष-विपक्ष एक साथ बैठेंगे। इस बार विधानसभा सत्र में जनता और जनहित से जुड़े 1100 सवालों पर चर्चा होनी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछली बार की तरह तमाशा होगा या फिर गंभीरता से लोगों की तकलीफों को दूर करने पर विचार किया जाएगा।
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इस बार भी गंभीरता कम
बजट सत्र में हंगामे के चलते 196 सवाल नहीं उठ पाए। वहीं विपक्ष या तो वैल में रहा या फिर बॉयकाट पर। वैसे मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में ही दिखने लगा है कि इस बार भी गंभीरता कम नूराकुश्ती ज्यादा होगी।

सदन को को गरिमापूर्ण तरीके से चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष जहां विपक्ष पर डाल रहा है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सत्तापक्ष की इच्छा ही नहीं कि सदन चले, क्योंकि इससे उसके कार्यों का खुलासा हो जाएगा।
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परंपरा के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने मंगलवार को विधानसभा में सर्वदलीय बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने सत्तापक्ष और विपक्ष से सदन को शांतिपूर्वक चलाने में सहयोग की अपील की। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने आश्वासन दिया कि विपक्ष सदन चलाने में पूरा सहयोग करेगा।

वहीं संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने कहा कि नियमों के तहत उठाए गए सवालों का जवाब जरूर दिया जाएगा। कुल मिलाकर आधे घंटे में ही सर्वदलीय बैठक समाप्त हो गई। इसकी गंभीरता इसी से दिखी कि बैठक में नेता सदन भी शामिल नहीं हुए।

ऐसा पिछली बार भी हुआ
कुछ इसी तरह का दृश्य बजट सत्र के पहले हुई सर्वदलीय बैठक में दिखा था। सत्ता पक्ष नियमों के तहत उठाए गए सवालों का जवाब देने की बात कहता रहा था। विपक्ष ने भी सहयोग करने का इरादा जाहिर किया था।

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इसके बावजूद बजट सत्र के दौरान शायद ही ऐसा कोई दिन रहा हो जिस दिन पूरे दिन सदन चला हो। विपक्ष ने कहा कि सरकार सुन नहीं रही है और सरकार का कहना था कि विपक्ष नियमों के तहत चर्चा का इच्छुक नहीं है।

साफ है कि सदन चलने देने की चिंता होती तो पक्ष-विपक्ष के बीच बातचीत कुछ और ही होती। सत्ता पक्ष की ओर से यह पूछा जाता कि प्रश्नकाल को चलने देने के लिए विपक्ष क्या करेगा। विपक्ष का सवाल होता कि सत्ता पक्ष कि न नियमों की बात कर रहा है।

आपदा पर बचाव और हमले की तैयारी
कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक सत्र कितने दिन चलेगा यह इस पर निर्भर करेगा कि आपदा पर सरकार खुली चर्चा स्वीकार करती है या नहीं। अगर आपदा पर चर्चा होती है तो सदन चलेगा। विपक्ष की रणनीति ही यह है कि आपदा पर सरकार को घेरकर नाकाम साबित किया जाए। बचाव में सरकार की कोशिश भी होगी कि आपदा का मुद्दा तूल पकड़ ही न पाए।

विपक्ष है दोषी
विधानसभा का सत्र सदन में जनता के मामले रखने के लिए होता है। यदि सरकार को सत्र चलाना ही नहीं हो तो एक दिन के लिए बुलाकर खानापूरी हो सकती है। विपक्ष जब जिद पकड़ लेता है तब दिक्कत होती हैं। विपक्ष सदन में हो-हल्ला करके मीडिया में जगह पाना चाहता है। विपक्ष के रवैये के कारण ही सदन नहीं चल पाता।
- इंदिरा ह्दयेश, संसदीय कार्यमंत्री

सत्तापक्ष नहीं सुनता बात
विपक्ष सदन में तभी हंगामा करता है जब उसे अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया जाता। जहां तक प्रश्नकाल में हंगामे की बात है तो विपक्ष को चर्चा के आवेदनों को नियम कानूनों के मकड़जाल में उलझा दिया जाता है। हम नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग करते हैं, लेकिन स्पीकर उसे नियम 58 में तब्दील कर देते हैं। इससे विपक्ष को समय नहीं मिलता।
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- अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष

पिछले सत्र का हाल
- बिना चर्चा के पारित हो गया था बजट
- प्रश्नकाल एक दिन भी नहीं चल पाया
- विभागों से संबंधित सवाल नहीं उठे
- पांच दिन के सत्र में कुछ घंटे ही चला सदन
- 912 सवाल लगे थे, 196 अनुत्तरित रह गए
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