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बिगाड़ दी 'केदारनाथ' की सूरत

Tue, 24 Sep 2013 01:47 PM IST
अमर उजाला, केदारनाथ
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एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) केदारनाथ मंदिर को उसके मौलिक स्वरूप में लाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण चल रहा है। एएसआई का मानना है कि सुंदरीकरण के लिए मंदिर के मौलिक स्वरूप से छेड़छाड़ की गई है।
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केदारनाथ संरक्षण परियोजना के निदेशक डा. रामनाथ सिंह फोनिया बताते हैं कि पहले मंदिर के गर्भगृह में पत्थर लगे हुए थे। इन पत्थरों के ऊपर मार्बल लगाकर पहली गलती की गई है।

लोगों के हाथ में ज्योर्तिलिंग
इससे अंदर फिसलन और ठंडक तो बढ़ी ही, फिलिंग से ज्योर्तिलिंग (केदार शिला) तक लोगों के हाथ पहुंचने लगे। पहले इस शिला पर न तो लोग हाथ लगा पाते थे और न ही सिर।
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एएसआई मंदिर में मार्बल हटाकर केदारनाथ में ही मिलने वाले पत्थर वहां लगाएगी ताकि इसका प्राचीन स्वरूप लौट आएगा।

जगह-जगह टपक रहा पानी
केदारनाथ मंदिर में जगह-जगह लीकेज है। बारिश होने पर मंदिर के अंदर और बाहर की ओर दीवारों पर पानी टपकने लगता है।

एएसआई की टीम ने मंदिर के चारों ओर टपकने वाले स्थानों की ढूंढ की है। अब एएसआई की कैमेस्ट्री ब्रांच इन लीकेज को बंद करेगी।

गिर रहा तापमान
केदारनाथ में तापमान काफी गिर गया है। बारिश होते ही ऊपरी चोटियों पर बर्फबारी होने लगती है। हालांकि दो दिन से धाम में मौसम साफ है और धूप खिल रही है। शाम के वक्त चल रही तेज हवा ठिठुरन बढ़ा रही है। पानी इतना ठंडा है कि हाथ लगाना मुश्किल हो जाता है।

बादलों की गड़गड़ाहट से नींद उड़ी
रात के वक्त बादलों की गड़गड़ाहट और बारिश मंदिर के निकट रह रहे श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों को डरा रही है।

समिति के कर्मचारी राजकुमार नौटियाल बताते हैं कि चार दिन पहले रात 12 बजे इतनी जोर से बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली चमकी कि लोग जूते पहनकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को तैयार हो गए।

रात को मोबाइल फोन नहीं कर रहे काम
धाम में रात को अकसर बीएसएनएल की मोबाइल फोन सेवा ठप हो जाती है। इस स्थिति में किसी से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। यहां तैनात लोग बताते हैं कि जिस रात कोई अधिकारी धाम में रहता है, उस दिन रात को भी मोबाइल फोन काम करते हैं।
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