याचिका में कहा गया कि कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने अधिवक्ताओं के प्रति अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि न्यायमूर्ति ने 11 मई को केस की सुनवाई के दौरान अपने साथी जज के खिलाफ भी ऐसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया।
जिससे न सिर्फ न्यायमूर्ति, अदालत की अवमानना हुई, बल्कि हाईकोर्ट के समस्त जजों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायमूर्ति ने एक ऐसे मामले को भी निस्तारित किया जिसके वह वकील रहे हैं।