ब्रह्मचारी दयानंद का यह भी कहना है कि मालवीय सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान संवैधानिक तरीके से डीएम का विरोध करने के दौरान ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को हिरासत में लिया।
उनके साथ मारपीट की गई और मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया। वादी के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने बताया कि अदालत ने वाद स्वीकार कर लिया है और 27 जनवरी को वादी का बयान दर्ज कराने का आदेश दिया है।
दूसरी ओर डीएम दीपक रावत ने मातृसदन के आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। उनका कहना है कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को पुलिस हंगामा करने के बाद ले गई थी। फिर कानून सम्मत उनका शांतिभंग में चालान किया गया। डीएम दीपक रावत का कहना है कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।