लंबी बहस के बाद तैयार हुई तबादला नियमावली में भी उत्तराखंड शासन ने सिफारिशी शिक्षकों के मनमाने तबादले का जुगाड़ कर दिया है।
मारामारी से बचने का हथियार
नई नियमावली के अनुसार कुल अनिवार्य तबादलों में से 50 प्रतिशत अनुरोध के आधार पर होंगे। हालांकि, अधिकारी इस नियम को अनुरोध के नाम पर मचने वाली मारामारी से बचने का हथियार बता रहे हैं। लेकिन, जानकारों का कहना है कि इस नियम का फायदा सिर्फ और सिर्फ पहुंच वाले शिक्षकों को ही मिलेगा।
जिनकी पहुंच नहीं है, उनका अनुरोध परंपरा के अनुसार फाइलों में दबा रह जाएगा। प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों के लिए शासन व शिक्षा विभाग पर भारी दबाव है।
कुछ मंत्री और विधायक तो तबादलों में उनका कोटा तय करने तक की मांग कर रहे थे। यह तो नहीं हो पाया, लेकिन सिफारिशी शिक्षकों के लिए दूसरा रास्ता तलाश लिया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि अनुरोध के आधार पर तबादलों का प्रतिशत तय करना गलत है। यह नियम पहुंच वाले शिक्षकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
शासन के साथ हुई बैठक में अनुरोध के आधार पर पांच फीसदी तबादलों पर सहमति बनी थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना गलत है। अनुरोध के आधार पर 99 फीसदी तबादले सिफारिशी और पैसे वालों के होते हैं
- दिग्विजय चौहान, प्रांतीय महामंत्री, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
तो इसलिए विचलन से दी मंजूरी
सूत्र बताते हैं कि संशोधित तबादला नियमावली को कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा गया था, लेकिन कुछ विधायक व मंत्री चाहते थे कि शिक्षकों के तबादलों में उनका कोटा तय किया जाए। इनके विरोध के चलते नियमावली को कैबिनेट में नहीं रखा जा सका। यही वजह रही कि मुख्यमंत्री ने इसे विचलन से मंजूरी दी।
अधिकारियों का तर्क
पिछले वर्ष 3521 शिक्षकों के तबादले हुए थे। इसमें 2057 तबादले अनुरोध के आधार पर हुए। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस बार भी हजारों आवेदन अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए आए हैं।
ऐसे में यदि अनुरोध के आधार पर तबादलों का प्रतिशत निर्धारित न किया जाता तो विभाग पर तबादलों के लिए दबाव बढ़ता। अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए प्रतिशत निर्धारित किए जाने से जरूरतमंद शिक्षक ही दुर्गम से सुगम में आ सकेंगे।
अनिवार्य तबादले की शर्त
यदि कोई प्राथमिक विद्यालय शिक्षक विहिन हो रहा है तो अनिवार्य तबादले के बावजूद शिक्षक को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 50 फीसदी से अधिक शिक्षकों की कमी होने पर भी यह नियम लागू होगा।