करीब 70 करोड़ की लागत से इस पहाड़ी के उपचार के बावजूद अक्सर बरसात में इस पहाड़ी से शहर क्षेत्र में पत्थर गिरने की घटनाएं होती रही हैं। इस खतरे को देखते हुए आजकल वरुणावत के तांबाखानी वाले हिस्से का ट्रीटमेंट किया जा रहा है।
इसकी समीक्षा करते हुए डीएम डा. आशीष चौहान ने शीर्ष पर उपचार स्थल के आसपास जमा मलबे को अभी तक नहीं हटाए जाने पर नाराजगी जताई। इस मौके पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीएस पुंडीर, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद रहे।
वरुणावत ट्रीटमेंट के दौरान हुई गड़बड़ियों का लोकायुक्त की जांच में खुलासा होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया था।
इस संबंध में लोक सेवक संघ के संयोजक बुद्धि सिंह पंवार द्वारा दाखिल रिट पर हाईकोर्ट ने सरकार को वरुणावत मामले में चल रही विजिलेंस जांच तीन माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए थे।
बुद्धि सिंह पंवार ने बताया था कि वर्ष 2003 में जिला मुख्यालय पर तबाही मचाने वाले वरुणावत भूस्खलन की त्रासदी से उबरने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने ढाई सौ करोड़ का बजट दिया था।
वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत इस बजट में भारी गोलमाल किया गया था। उनकी शिकायत पर इस कार्य की लोकायुक्त जांच की गई थी। लोकायुक्त जांच में वर्ष 2007 में करोड़ों का घोटाला सामने आया था। इस पर निर्माण कंपनी से 1.60 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई थी, लेकिन न तो दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही घोटाले की रकम की पूरी वसूली हुई।