फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंडः सालों पहले वरुणावत पर्वत ने मचाई थी तबाही, अफसरों के इस आदेश से याद हुई ताजा

Fri, 19 Jul 2019 09:07 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
विज्ञापन
वरुणावत पर्वत - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

मानसून की बरसात के दौरान वरुणावत पर्वत से भूस्खलन की आशंका को देखते हुए डीएम ने लोनिवि के अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि सितंबर 2003 में बिना बारिश के करीब एक माह तक जारी रहे वरुणावत भूस्खलन से उत्तरकाशी नगर में भारी तबाही मची थी। इसके बाद भी इंदिरा कालोनी वाले हिस्से में कई बार बोल्डर गिरने से अफरातफरी मच चुकी है।

विज्ञापन

पहाड़ी से शहर क्षेत्र में पत्थर गिरने की घटनाएं होती रही हैं

करीब 70 करोड़ की लागत से इस पहाड़ी के उपचार के बावजूद अक्सर बरसात में इस पहाड़ी से शहर क्षेत्र में पत्थर गिरने की घटनाएं होती रही हैं। इस खतरे को देखते हुए आजकल वरुणावत के तांबाखानी वाले हिस्से का ट्रीटमेंट किया जा रहा है।

इसकी समीक्षा करते हुए डीएम डा. आशीष चौहान ने शीर्ष पर उपचार स्थल के आसपास जमा मलबे को अभी तक नहीं हटाए जाने पर नाराजगी जताई। इस मौके पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता बीएस पुंडीर, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल आदि मौजूद रहे।

लोकायुक्त की जांच में हुआ था गड़बड़ियों का खुलासा

वरुणावत ट्रीटमेंट के दौरान हुई गड़बड़ियों का लोकायुक्त की जांच में खुलासा होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया था।

इस संबंध में लोक सेवक संघ के संयोजक बुद्धि सिंह पंवार द्वारा दाखिल रिट पर हाईकोर्ट ने सरकार को वरुणावत मामले में चल रही विजिलेंस जांच तीन माह के भीतर पूरी करने के आदेश दिए थे। 
विज्ञापन

2007 में करोड़ों का घोटाला सामने आया था

बुद्धि सिंह पंवार ने बताया था कि वर्ष 2003 में जिला मुख्यालय पर तबाही मचाने वाले वरुणावत भूस्खलन की त्रासदी से उबरने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने ढाई सौ करोड़ का बजट दिया था।

वरुणावत ट्रीटमेंट के तहत इस बजट में भारी गोलमाल किया गया था। उनकी शिकायत पर इस कार्य की लोकायुक्त जांच की गई थी। लोकायुक्त जांच में वर्ष 2007 में करोड़ों का घोटाला सामने आया था। इस पर निर्माण कंपनी से 1.60 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई थी, लेकिन न तो दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही घोटाले की रकम की पूरी वसूली हुई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें