डाटा एंट्री करवाई
राज्य की कुछ तहसीलें ऐसी भी हैं, जहां लंबित मामलों की संख्या शून्य तक है। इनमें किच्छा, खटीमा, पूर्णागिरी, आदीबद्री, धनोल्टी, मुनस्यारी और तेजम का नाम शामिल है। राजस्व न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण के बाद वादों की डाटा एंट्री करवाई की जा रही है। अब तक प्रदेश में 411 राजस्व न्यायालयों को ऑनलाइन किया जा चुका है। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में राजस्व वादों में और कमी आएगी।
| जिला |
कुल मामले |
लंबित |
प्रतिशत में |
| अल्मोड़ा |
8446 |
1172 |
13.00 |
| उत्तरकाशी |
7907 |
1011 |
12.00 |
| यूएस नगर |
91553 |
12803 |
13.00 |
| चंपावत |
4197 |
41 |
00.97 |
| चमोली |
4854 |
411 |
08.04 |
| टिहरी |
12944 |
4875 |
37.66 |
| देहरादून |
179272 |
64615 |
36.00 |
| नैनीताल |
59746 |
3239 |
05.04 |
| पिथौरागढ़ |
3883 |
264 |
06.79 |
| पौड़ी |
18299 |
48 |
00.26 |
| बागेश्वर |
2757 |
163 |
05.91 |
| रुद्रप्रयाग |
2386 |
40 |
01.67 |
| हरिद्वार |
112149 |
44706 |
39.86 |
| कुल |
508395 |
133388 |
26.00 |
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राजस्व वादों की शासन स्तर पर हर हफ्ते निगरानी की जा रही है। ऑनलाइन म्यूटेशन के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। सरकार का प्रयास है सभी तहसीलों में वादों को शून्य प्रतिशत तक लाया जाएगा। मैदानी जिलों में जमीन की खरीद फरोख्त अधिक होने से यहां वादों की संख्या बढ़ जाती है। -चंद्रेश यादव, आयुक्त एवं सचिव, उत्तराखंड राजस्व परिषद।