01 मार्च से सीधे 300 मेगावाट की कमी
- जनवरी से 28 फरवरी तक: मध्य प्रदेश(40 मेगावाट), उत्तर प्रदेश(40 मेगावाट), पश्चिम
बंगाल(70 मेगावाट), ओडिशा(50 मेगावाट), बिहार (50 मेगावाट), असम(50 मेगावाट)
- 01 फरवरी से 31 मार्च तक: कर्नाटक से 100 मेगावाट।
(कुल 400 मेगावाट में से 300 मेगावाट बिजली ही केवल 28 फरवरी तक मिलेगी। 100 मेगावाट
बिजली 31 मार्च तक मिलती रहेगी।)
रविवार को यह रही बिजली की मांग व उपलब्धता
- प्रदेश में बिजली की कुल मांग : 38-40 मिलियन यूनिट तक
- यूजेवीएनएल से मिलने वाली बिजली : 11 मिलियन यूनिट
- केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली : 22 मिलियन यूनिट
- कुल उपलब्ध बिजली : 33 मिलियन यूनिट तक
- मांग के सापेक्ष किल्लत : 03 से 04 मिलियन यूनिट
- रविवार को खरीदी गई बिजली: 3.37 मिलियन यूनिट
केंद्र से विशेष बिजली मिलने का फायदा
- बाजार में बिजली के दाम : 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट
- केंद्रीय पूल की बिजली के दाम : 4.50 से 5 रुपये प्रति यूनिट
(केंद्रीय पूल से जो सस्ती बिजली मिली थी, उससे यूपीसीएल ने प्रतिदिन करीब सात करोड़ बचाए)
सरकार लगातार केंद्रीय कोटे से बिजली के लिए प्रयासरत है। खुद मुख्यमंत्री ने इस मामले में मोर्चा संभाला हुआ है। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। 28 फरवरी से 300 मेगावाट बिजली नहीं मिली, जिसका असर आपूर्ति पर पड़ सकता है। 28 फरवरी की बैठक पर भी हमारी निगाहें हैं।
-अनिल कुमार, एमडी, यूपीसीएल