उत्तराखंड में नदियों के किनारों से दो सौ मीटर दूरी तक निर्माण पर भले ही हाईकोर्ट ने रोक लगा दी हो, लेकिन राजधानी में यह आदेश बेमानी साबित हो रहा है।
आलम यह है कि नदियों के बाहर तय दूरी की बात तो दूर, नदियों के भीतर घुसकर ही भूमाफिया धड़ल्ले से निर्माण और कब्जे कर रहे हैं। खास बात यह है कि नदी किनारे श्मशान घाटों पर भी भूमाफिया की नजर है। राजस्व और वन विभाग के कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं।
यहां हो रहे निर्माण
सौंग नदी में रायपुर से लेकर डोईवाला तक, सुसवा नदी में मोथरोवाला से बुल्लावाला तक, राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमा पर। सुसवा नदी के किनारे नौका में श्मशान की जमीन पर भी निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा खट्टापानी और दूधली में भी कई जगह निर्माण किया जा रहा है।
ऐसे चल रहा खेल
सूत्रों की मानें तो राजस्व विभाग कर्मचारियों की मिलीभगत से जमीनों के खसरा नंबर बदल दिए जाते हैं। जमीन कहीं और रहती है, जबकि रिकार्ड में नंबर कोई और दर्शा दिया जाता है। दूसरी ओर, वन विभाग कर्मियों की मिलीभगत से ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जाती।