देर शाम पूर्व विधायक नारायण पाल ने बताया कि प्रशासन की ओर से उत्तर प्रदेश जाने देने से रोकने के बाद पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो लखीमपुर जाकर पीड़ित परिवार से मिलेगी। पाल ने बताया कि कमेटी में उनके अलावा कार्यकारी अध्यक्ष तिलक राज बेहड़, अल्मोड़ा के सांसद प्रदीप टम्टा, कार्यकारी कांग्रेस अध्यक्ष भुवन कापड़ी और जसपुर विधायक आदेश चौहान हैं।
रणजीत रावत को सितारगंज से लौटाया
लखीमपुर कूच कर रहे कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह रावत को स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अमरिया चौक पर रोक लिया। काफी समझाने के बाद रणजीत रावत समर्थकों के साथ वापस लौट गए। हल्द्वानी से सिडकुल होते हुए सितारगंज की ओर आते हुए कांग्रेस नेताओं के वाहनों को नगर स्थति अमरिया चौक पर प्रशासन व पुलिस ने नाकाबंदी कर अमरिया पीलीभीत बॉर्डर में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया। वे यूपी में प्रवेश करने की जिद में अड़े रहे, जिस पर एसडीएम तुषार सैनी और पुलिस अधिकारी उन्हें समझा बुझाकर सिडकुल चौकी ले गए, जहां से वापस भेज दिया। रणजीत रावत ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। वहां एसएसआई योगेश कुमार, एलआइयू इंचार्ज भाष्कर बडोला, तारा नेगी, सरताज अहमद, मुख्तार अंसारी, लीलाधर जोशी, मोईन खान, नीरज कुमार, दीपक बिष्ट आदि थे।
जनजागरण अभियान चलाकर बेनकाब करेंगे सरकार का तानाशाही चेहरा: हरदा
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड में यकीनन दलित मुख्यमंत्री होना चाहिए। राहुल गांधी ने पंजाब में दलित मुख्यमंत्री बनाकर इसकी शुरुआत कर दी है। हम भी अपने जीवनकाल में उत्तराखंड में दलित के बेटे को सीएम बनने देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा में चुनाव हारने के डर से असहज की स्थिति है। दावा किया कि एक महीने में भाजपा में भगदड़ की स्थिति होने वाली है।
बृहस्पतिवार को सीतापुर कूच के दौरान एलाइंस कालोनी गेट पर कुछ देर के लिए रुके पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि केंद्र, यूपी और उत्तराखंड की सरकार तानाशाही रवैया अपना रही हैं। तीन काले कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर छह सौ से अधिक किसान जान दे चुके हैं। कानूनों का विरोध करने पर हरियाणा में पुलिस डंडे से पीट रही है और यूपी में केंद्रीय मंत्री के बेटे ने गाड़ी से किसानों और पत्रकार को कुचलकर मार डाला। दुखी किसान परिवारों के आंसू पोंछने गईं प्रियंका गांधी को बिना जुर्म हिरासत में रखा गया। यह लड़ाई तब तक चलेगी जब तक तीनों कानून रद्द नहीं हो जाते हैं।