उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में टिकट काटने के लिए कोई महिला परिचालक आए तो चौंकियेगा नहीं। क्योंकि अब महिलाएं भी बसों में कंडक्टर होंगी।
संविदाकर्मी महिलां बनेंगी बसों में परिचालक
असल में, जिन संविदाकर्मी महिलाओं को नियमित किया गया है, वे सब बसों में परिचालक बनेंगी। नियम के अनुसार, नियमित होने वाले सभी कर्मचारियों को पहले फील्ड ड्यूटी करनी होगी। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि किन-किन रूटों पर इन महिला कर्मियों को तैनाती दी जाएगी।
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पिछले एक दशक की लड़ाई के बाद उत्तराखंड परिवहन निगम ने संविदाकर्मियों और मृतक आश्रितों को नियमित करने की मांग को माना। संविदाकर्मियों और मृतकआश्रितों में लगभग 95 महिलाएं भी हैं। इनमें 73 महिलाएं शिक्षित हैं। इन सब 73 महिलाओं को फील्ड ड्यूटी के तहत परिचालक का पद मिलना है।
टनकपुर डिपो में किया गया था तैनात
इससे पहले टनकपुर डिपो में भी कुछ दिन महिला कर्मियों को परिचालक के पद पर तैनात किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें ऑफिस में अटैच कर दिया गया। वहीं नियमित होने वाली महिलाओं को हाईटैक और साधारण बसों में पहले तैनाती दी जा सकती है।
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रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महासचिव विजय कुमार ममगांई बताते हैं कि, असल में नियमित होने वालों के लिए दो ही पद होते हैं। या तो वह चालक बनते हैं या परिचालक। ऐसे में महिलाओं को परिचालक के पद में ही तैनाती दी जा सकती है।
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