इन्हें खोलने और सही क्रम में रखने के लिए श्रमिक गौतम पिलर पर चढ़ा हुआ था। अचानक लोहे के गाटरों के नीचे लगी लकड़ी की कड़ी टूट गई और पिलर पर रखे 35 ब्लॉक बोल्डर खिसककर नीचे गिरने लगे। इस दौरान ब्लॉक बोल्डरों के ऊपरी हिस्से पर चढ़ा गौतम भी पिलर के बीच बने गहरे कुएं में जा गिरा।
इसके बाद सारे बोल्डर कुएं में जा गिरे और श्रमिक भी उसी में दब गया। हादसे के बाद साथी श्रमिक और क्रेन चालक घटनास्थल की ओर भागे। तब तक श्रमिक गहरे कुंए में भरे पानी और बोल्डर के बीच दब चुका था।
मौके पर कंपनी के अधिकारी और पुलिस के सिपाही पहुंचे। श्रमिक को बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ टीम भी पहुंची। पंप के जरिए कुएं में भरे पानी को निकालने के लिए काफी देर तक कोशिश जारी रही, लेकिन देर शाम तक गौतम को बाहर नहीं निकाला जा सका।
नदी पर पुल निर्माण के लिए पिलर तो बना दिए गए, लेकिन इसमें मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। इसका नतीजा ये रहा कि एक पिलर की बुनियाद तिरछी हो गई। तिरछे पिलर को पहली निर्माण कंपनी ने भी सीधा करने की काफी कोशिश की किंतु सफल नहीं हुई।
इसके बाद वर्तमान में कार्य कर रही उप्र राज्य सेतु निगम की ओर से इसे भी लगातार दो सालों से सीधा करने की जद्दोजहद जारी थी। पिछले कई दिनों से इसके एक किनारे पर वजनी ब्लॉक बोल्डर रखे जाने का क्रम चल रहा था।
हादसे के बाद भी नहीं चेते कंपनी के अधिकारी
हादसे के बाद भी कंपनी के अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। कुएं में गिरे श्रमिक कोे निकालने के कार्य में दूसरे श्रमिकों को बिना किसी सेफ्टी उपकरण के बचे हुए ब्लॉक पिलर पर क्रेन की तार बांधने के लिए भेज दिया गया। हालांकि कुछ देर बाद मौके पर खड़े लोगों के एतराज पर सेतु निगम के अधिकारी चेते और श्रमिक को दोबारा सिर्फ हेल्मेट पहनाकर भेज दिया गया।