न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग पर श्रमिकों की नाराजगी कम नहीं हुई है लेकिन वर्तमान न्यूनतम वेतन दिए जाने को लेकर पूरे राज्य में श्रमिकों और कंपनियों के बीच कोई विवाद भी नहीं हुआ है।
पूरे वर्ष में राज्य के एक भी श्रमिक ने इस बात की शिकायत दर्ज नहीं कराई है कि उसे निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम का भुगतान किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में श्रमिकों और कंपनियों के बीच सबसे अधिक विवाद बोनस को लेकर सामने आया। श्रमिकों ने अधिक बोनस का दावा लेकर श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें अधिकांश मामलों में श्रमिकों के वाद सही पाए गए और श्रम विभाग ने कंपनियों से श्रमिकों को उचित बोनस का भुगतान कराया।
श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूरे वित्त वर्ष में 28535 श्रमिकों ने पर्याप्त बोनस न दिए जाने को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। विभाग ने इन सभी मामलों में कुल मिलाकर 37,67,15,430.75 रुपये का बोनस भुगतान कराया।
तनाव के बाद श्रम विभाग ने स्पष्ट किया
इसके अलावा ग्रेच्युटी के रूप में हुए विवाद में श्रमिकों को 1.61 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। समान वेतन अधिनियम के अंतर्गत श्रमिकों को 16.79 लाख रुपये, वेतन संबंधी अन्य वाद में 5.41 लाख रुपये और प्रतिपालक मामलों में 85.36 लाख रुपये का भुगतान श्रमिकों को किया गया।
न्यूनतम वेतन पर पैदा हुए तनाव के बाद श्रम विभाग ने स्पष्ट किया था कि उत्तराखंड में अकुशल, अर्धकुशल और कुशल सभी वर्ग के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन पड़ोसी राज्यों से अधिक है। विभाग ने श्रमिक संगठन के नेताओं, औद्योगिक कंपनियों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर श्रमिकों से बेहतर तालमेल स्थापित कर संघर्ष टालने का सुझाव दिया था। कंपनियों में शिकायत निवारण समिति गठित करने और चिकित्सा सहायता व्यवस्था बेहतर बनाने के भी सुझाव दिए गए हैं।
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श्रम विभाग श्रमिकों का हित सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पिछले एक साल में पूरे राज्य में एक भी श्रमिक ने इस बात की शिकायत नहीं की कि उसे निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया गया। यह बताता है कि राज्य में श्रमिकों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं।
-अनिल चंद्र पेटवाल, अपर श्रम आयुक्त