कुंभ आमजन का पर्व है। समुद्र मंथन के बाद जब कुंभ स्नान प्रारंभ हुए तब भी यह अमृत सभी को समान रूप से मिलता था और आज भी। अनेक तपस्वी साधु संत भी यह अमृत पाते हैं और फकीर भी। कुंभ स्नान के समय राजा और रंक को पुण्यमयी अमृत की समान मात्रा प्राप्त होती है। आकाश से द्रव रूप में बरस रही सोमलताएं भी मानव या जीव में फर्क नहीं करती।
गंगा के तटों पर गोते लगाने जो भी आएगा, आरोग्य अमृत वही पाएगा। कुंभ के मुख्य स्नान के बाद स्नानार्थी स्थायी अमरत्व की कामना लेकर छोटे-छोटे कलश भी दान करते हैं। चावल चीनी से भरे ये कलश समृद्धि प्रदान करते हैं। वेद शास्त्रों के अनुसार कुंभ योग तब तक रहेगा जब तक कि सूर्य देव एक महीने मेष राशि में निवास करने के बाद वृष राशि में नहीं चले जाएंगे।
कुंभ का मुख्य स्नान बेशक बुधवार को संपन्न हो जाएगा, लेकिन पूर्ण कुंभ योग 13 मई तक रहेगा। 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा को होने वाला कुंभ का आखिरी शाही स्नान यद्यपि केवल बैरागी करेंगे, लेकिन वह स्नान संपूर्ण कुंभ योग में संपन्न होगा।