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कुंभ शाही स्नान आज : ब्रह्मांड की सोमलताओं से आज बरस रहा सोमरूपी अमृत, भक्त और अखाड़े कर रहे स्नान

Wed, 14 Apr 2021 09:57 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

कुंभनगरी में बुधवार को मेष संक्रांति पर शाही स्नान व बैसाखी का पर्व स्नान है।
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मेष संक्रांति पर शाही स्नान व बैसाखी का पर्व स्नान है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरिद्वार के प्रत्येक कुंभ में अमृत योग 14 अप्रैल को ही आता है। देवगुरु बृहस्पति पहले ही कुंभ राशि में प्रविष्ट हो चुके हैं। भरणी नक्षत्र में भगवान भास्कर बुधवार को मेष राशि में प्रवेश कर चुके हैं। सुबह सात बजे के बाद हरकी पैड़ी अखाड़ों के लिए आरक्षित हो गई।

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ऐसे में सुबह सात बजे तक ही स्नान हरकी पैड़ी पर श्रद्धालु कर पाए। कुंभनगरी में बुधवार को मेष संक्रांति पर शाही स्नान व बैसाखी का पर्व स्नान है। इसके साथ ही सुबह सात बजे हरकी पैड़ी को संतों के लिए खाली कराया गया। उसके बाद सबसे पहले हरकी पैड़ी पर निरंजनी अखाड़ा के संत स्नान के लिए पहुंचे।
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सूर्य के मेष में आते ही हरकी पैडी ब्रह्मकुंड पर ब्रह्मांड और स्वर्ग की सोमलताओं से अमृत रूपी सोम की वृष्टि प्रारंभ हो गई है। हरकी पैड़ी पर स्नान करने आए लाखों श्रद्धालुओं को गंगाजल के माध्यम से अमृत की प्राप्ति हो रही हे। अमृत योग में डुबकी लगाते ही कुंभ का मन्तव्य सार्थक हो रहा है।

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अनेक तपस्वी साधु संत भी यह अमृत पाते हैं

कुंभ आमजन का पर्व है। समुद्र मंथन के बाद जब कुंभ स्नान प्रारंभ हुए तब भी यह अमृत सभी को समान रूप से मिलता था और आज भी। अनेक तपस्वी साधु संत भी यह अमृत पाते हैं और फकीर भी। कुंभ स्नान के समय राजा और रंक को पुण्यमयी अमृत की समान मात्रा प्राप्त होती है। आकाश से द्रव रूप में बरस रही सोमलताएं भी मानव या जीव में फर्क नहीं करती।

गंगा के तटों पर गोते लगाने जो भी आएगा, आरोग्य अमृत वही पाएगा। कुंभ के मुख्य स्नान के बाद स्नानार्थी स्थायी अमरत्व की कामना लेकर छोटे-छोटे कलश भी दान करते हैं। चावल चीनी से भरे ये कलश समृद्धि प्रदान करते हैं। वेद शास्त्रों के अनुसार कुंभ योग तब तक रहेगा जब तक कि सूर्य देव एक महीने मेष राशि में निवास करने के बाद वृष राशि में नहीं चले जाएंगे।

कुंभ का मुख्य स्नान बेशक बुधवार को संपन्न हो जाएगा, लेकिन पूर्ण कुंभ योग 13 मई तक रहेगा। 27 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा को होने वाला कुंभ का आखिरी शाही स्नान यद्यपि केवल बैरागी करेंगे, लेकिन वह स्नान संपूर्ण कुंभ योग में संपन्न होगा।
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