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कुंभ का ‘अमृत छकने को’ यहां हो रहा प्रतिनियुक्ति का खेल 

Sat, 24 Mar 2018 10:58 AM IST
रतनमणी डोभाल , अमर उजाला, हरिद्वार
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kumbh mela - फोटो : file photo
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कुंभ मेला 2021 में होना हैं और कुंभ का अमृत छकने के लिए अधिकारियों को मूल विभाग से मेला प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का खेल शुरू हो गया है। पहली प्रतिनियुक्ति ओएसडी के पद पर हुई है। यह प्रतिनियुक्ति भी नियम विरुद्ध मूल विभाग की एनओसी के बिना कर दी गई।

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शासन ने कलक्ट्रेट देहरादून के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी महेश चंद्र शर्मा को विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया है। जिनका मूल विभाग राजस्व परिषद उत्तराखंड है। एनओसी के बिना ही पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। उन्हें एक महीने में मूल विभाग राजस्व परिषद का अनापत्ति प्रमाणपत्र लाकर कुंभ मेलाधिकारी को प्रस्तुत करने की छूट प्रदान की गई है।

शासन के सामान्य प्रतिपादित सिद्धांत, नियम और  पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिनियुक्ति मूल विभाग की अनापत्ति के बाद ही किए जाने की व्यवस्था है।  मुख्यमंत्री ने प्रतिनियुक्ति में पारदर्शिता और नियमों का पालन करने का निर्देश भी दिया था, लेकिन उनके मंत्री और खास अधिकारी चहेतों की मनमानी प्रतिनियुक्ति कराने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिस अधिकारी को कुंभ मेला ओएसडी नियुक्त किया गया है। वह चर्चित और ख्याति प्राप्त है।
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तहसील हरिद्वार में प्रशासनिक अधिकारी पर रहते हुए महेश चंद्र शर्मा ने जिलाधिकारी से अपने को विशेष कार्याधिकारी नियुक्त करा लिया था। चार अगस्त 2017 से 12 नवंबर तक वह ओएसडी कुंभ मेला बने रहे, लेकिन शासन ने 13 नवंबर को उनका स्थानांतरण मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कलक्ट्रेट देहरादून के पद कर दिया था। उन्होंने इस पद को ज्वाइन तो किया, लेकिन विशेष कार्याधिकारी का चार्ज नहीं छोड़ा और वापसी के जुगाड़ में जुट गए। अंतत: उन्हें मूल विभाग की एनओसी के बिना भी प्रतिनियुक्ति कराने में सफलता मिल गई। इसके साथ ही कुछ और लोग भी जुगाड़ में लग गए हैं। 

कलक्ट्रेट देहरादून के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी महेश चंद शर्मा को शासन के निर्देश पर 14 मार्च को प्रतिनियुक्त पर विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) कुंभ मेला हरिद्वार नियुक्त किया गया है। उन्हें एक महीने के भीतर अपने मूल विभाग राजस्व परिषद उत्तराखंड से अनापत्ति प्रमाणपत्र लाकर कुंभ मेलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। अनापत्ति प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में प्रतिनियुक्ति स्वत: ही निरस्त मानी जाएगी। 
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- नितेश कुमार झा, सचिव उत्तराखंड शासन 

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