मामले में जहां शासन के आदेश पर जिलाधिकारी सी रवि शंकर की ओर से सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी जांच कर रही है। वहीं, जब कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिष्ठान की गर्दन फंसती दिखी तो उसने भी अपनी चार सदस्यीय कमेटी की जांच बैठा दी।
यही नहीं जांच के बाद कुंभ मेले में कोरोना जांच कराकर गए लोगों का मोबाइल से सत्यापन करना शुरू कर दिया, लेकिन हैरत की बात यह है कि मेला स्वास्थ्य प्रशासन के फिलहाल दस कर्मचारी ही मौजूद हैं। वह सभी को भी रोजाना मोबाइल फोन पर सत्यापन करने के लिए लगाए तो इसमें लंबा वक्त लग जाएगा।
यदि एक व्यक्ति से बात करने के लिए कम से कम तीन मिनट का समय भी लगाया जाए तो एक घंटे में बीस और एक कर्मचारी आठ घंटे में 160 लोगों से ही बात कर सकता है। दस कर्मचारी लगे तो दिनभर में वह 1600 लोगों से पूछताछ कर सकते हैं। ऐसे में ढाई लाख लोगों का सत्यापन करने में कम से पांच महीने का समय लग जाएगा।
जिसमें अवकाश के दिन भी शामिल रहेंगे, जबकि पांच माह तक कुंभ मेला अधिष्ठान स्वास्थ्य कार्यालय रहने की भी संभावना न के बराबर है। क्योंकि कुंभ मेला समाप्त हो चुका है और सभी व्यवस्थाएं अस्थायी तौर पर की गई थी।
कुंभ मेले में कोरोना जांच कराकर गए ढाई लाख श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन नंबरों पर बात करके उनसे जांच कराने का सत्यापन करने का काम वास्तव में बहुत बड़ा तो है, लेकिन सच्चाई जानने के लिए यह करना तो पड़ेगा ही। इसलिए कर्मचारी सत्यापन करने में लगे हुए हैं।
- डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर, मेलाधिकारी, (स्वास्थ्य) कुंभ मेला