मसूरी की बुक शाॅप में कुमार विश्वास
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उन्होंने ऑथर डायरी में लिखा कि पहाड़ों की रानी मसूरी में तीन दशक पहले जिस कुर्सी पर अपने प्रिय लेखक रस्किन बांड को बैठे देखा था, आज उस पर बतौर लेखक बैठकर ईश्वर के प्रति कृतज्ञ हुआ। वहीं, मीडिया कर्मियों ने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने निजी दौरा बताकर बात करने से मना कर दिया ।