उत्तराखंड में भी कुमाऊंनी होली की खास पहचान है। दो तरीके से होली मनाई जाती है-बैठकी और खड़ी होली। बैठकी होली में रंगों का त्योहार रागों के साथ मनाया जाता है।
बाकी जगह होली 14 मात्राओं में गाई जाती है, लेकिन कुमाऊं में दो मात्राएं अधिक हैं। रातभर चलने वाले होली गायन में राधा-कृष्ण के प्रेम और शिव आराधना पर आधारित नौ राग गाए जाते हैं।
वसंत पंचमी से ही बैठकी होली शुरू हो जाती है। जबकि खड़ी होली की शुरुआत मुख्य पर्व से पांच दिन पहले होती है। मंदिर में पूजन के बाद सफेद वस्त्र पहन रंग खेलकर खड़ी होली मनाई जाती है।
यह है बैठकी होली
बैठकी का तात्पर्य बैठने से है। कुमाऊंनी परंपरा के अनुरूप लोग किसी सार्वजनिक स्थल पर जुटते हैं और फिर बैठकर रातभर होली गीत गाते हैं। वक्त के साथ अब लोग सामूहिक तौर पर नहीं जुट पाते। ऐसे में घर-घर इस तरह के आयोजन होने लगे हैं।
कब, कौन सा राग
शुरुआत: राग यमन
इसके बाद: काफी, जंगला काफी, खम्माज, देश राग, पीलू, देर रात को विहाग
सुबह समापन: भैरव और भैरवी राग के साथ
...तो हेमंत बनाएंगे डाक्यूमेंट्री
मूलत: पिथौरागढ़ निवासी बालीवुड गायक हेमंत पंत के गायन की शुरुआत भी होली से हुई। हेमंत बताते हैं कि रागों का सरलीकरण करने के लिए इन्हें 16 मात्राओं में बांटा गया।
हालांकि, बाकी लोग यह होली नहीं गा पाते लेकिन कुमाऊं के लोगों को यह बहुत आसान लगता है। बताया कि इस होली को दुनिया जाने, इसके लिए संस्कृति विभाग से बात की है। फंड मिला तो वह इस पर डाक्यूमेंट्री बनाएंगे।