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Korean Game Addiction: कोरियन सुंदरता भारतीय अभिभावकों को दिखा रही कुरूप चेहरा, बच्चों के लिए बढ़ी चिंता

Fri, 06 Feb 2026 04:58 AM IST
अलका त्यागी अंकित यादव, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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कोरियन सुंदरता भारतीय अभिभावकों को कुरूप चेहरे दिखा रही है। गाजियाबाद की घटना इसका एक उदाहरण मात्र है। इससे अभिभावकों की बच्चों के प्रति चिंता बढ़ गई है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.जया नवानी के अनुसार भारत में कोरियन संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से मानसिक विकृति के शिकार हुए दून के करीब पांच लोग उनके पास पहुंच चुके हैं।

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कोरियन संस्कृति का प्रभाव इतना अधिक है कि किशोरियां अपने अभिभावकों से भारत छोड़ने तक की जिद करती हैं। यहां तक की उनके मन में भारतीय मूल के लड़कों के प्रति नफरत पैदा हो रही है। उन्होंने इस तरह के दो मामलों का जिक्र भी किया।

पहले मामले में एक किशोरी कोरियन संस्कृति पर आधारित बॉय बैंड, जिसे बैंगटन सोनयेओंदन (बीटीएस) कहते हैं, उसके कैंप के लिए कोरिया जाने की जिद कर रही थी। इसके अलावा एक युवती ने उनसे कहा कि जब से उसने कोरियन सीरियल देखना शुरू किया है उसके मन में भारतीय लड़कों के प्रति नफरत पैदा होने लगी है। उसे कोरियन मूल के लड़के से ही शादी करनी है। दोनों के अभिभावक उनकी ओपीडी में पहुंचे थे।
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अब गाजियाबाद से सामने आई कोरियन लवर गेम की प्रशंसक तीन बहनों की एक साथ जान देने की घटना ने अभिभावकों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है। डॉ.नवानी के मुताबिक किशोरों में बढ़ रहा फोन का अत्यधिक इस्तेमाल इसके पीछे का मुख्य कारण है। उनके अधिक समय तक बार-बार कोरियन सामग्री देखने से मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर बढ़ रहा है। यह उन्हें इसका आदी बना रहा है।

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ब्रेन का ब्रेक सिस्टम हो रहा फेल, उठ रहे गलत कदम
एम्स ऋषिकेश के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि कम नींद और अधिक स्क्रीन टाइम ब्रेन के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित कर रहा है। इससे लोग गलत कदम उठाने से खुद को नहीं रोक पा रहे हैं। यह ब्रेन का ब्रेक सिस्टम भी है जो बताता है कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं। गेम खेलना या किसी भी तरह की ऑनलाइन सामग्री का आदी होना इसकी मुख्य वजह है। एम्स के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह ऐसे चार से पांच मरीज पहुंचते हैं। चिकित्सक इन्हें इंपल्सिव डिसऑर्डर के रूप में पहचानते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
  • देखें कि बच्चे टास्क आधारित गेम ते नहीं खेलते
  • कहीं बच्चे नाम तो विदेशी भाषा में नहीं रख रहे
  • अपने दोस्तों या भाई-बहनों से तो नहीं कट रहे
  • विदेशी भाषा, संस्कृति से अत्यधिक लगाव तो नहीं
  • पहनावा, खान-पान, व्यवहार तो नहीं बदल रहा
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