मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में किसाऊ बांध बहुद्देशीय परियोजना पर आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने भी वर्चुअल प्रतिभाग किया।
इस परियोजना को फरवरी 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। यह परियोजना देहरादून व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में टोंस नदी पर प्रस्तावित है। किसाऊ बांध परियोजना एशिया की दूसरी सबसे बड़ी बांध परियोजना होगी। इसकी ऊंचाई 236 मीटर एवं लंबाई 680 मीटर होगी। किसाऊ राष्ट्रीय परियोजना 660 मेगावाट की है। यह 90 फीसदी केंद्र सरकार की सहायता से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के संयुक्त उपक्रम के तहत बनाई जानी है। करीब 12 हजार करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना से नीचे बहने वाली व्यासी जैसी परियोजनाओं में भी बिजली का उत्पादन बढ़ने की संभावना है। बांध से 1379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। इस परियोजना को लेकर छह राज्यों में करार हो चुका है। समझौते के तहत जल भंडारण का 93 प्रतिशत भाग हरियाणा, यूपी, राजस्थान और दिल्ली को मिलेगा, जबकि तीन-तीन प्रतिशत भाग हिमाचल व उत्तराखंड को मिलेगा।
सूत्रों के अनुसार, बांध निर्माण से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की 2950 हेक्टयर भूमि प्रभावित होगी। 17 गांवों के छह हजार से अधिक निवासी विस्थापित होंगे। गौरतलब है कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री कार्यालय में इस मुद्दे पर हुई बैठक में फैसला किया गया था कि परियोजना लागत के घटकों का विभाजन इस तरह से किया जाए, ताकि प्रभावित राज्यों के प्रतिकूल प्रभावों की भरपाई हो सके।