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Kisan Tractor Rally : कृषि कानूनों के विरोध में ऊधमसिंह नगर के किसानों ने निकाली ट्रैक्टर रैली, तस्वीरें

Thu, 07 Jan 2021 01:27 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर 
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
कृषि कानूनों के विरोध में ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर और सितारगंज में किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली। इस दौरान सैकड़ों किसान ट्रैक्टर रैली में शामिल हुए। बता दें कि उत्तराखंड का हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिला किसान बहुल जिला है। इन जिलों से सैकड़ों किसान गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल हुए हैं।
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
बुधवार को ऊधमसिंह नगर जिले के किसानों ने एलान किया कि किसान रैली के जरिए विरोध जताएंगे और पीछे नहीं हटेंगे। रैली को सफल बनाने के लिए गांव-गांव एलान किया गया। ट्रैक्टर-ट्रॉली रैली निकाले जाने को लेकर पुलिस-प्रशासन भी अलर्ट है। ट्रैक्टर रैली के दौरान लोगों को कई बार जाम का सामना करना पड़ा।
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
कांग्रेस की बैठक में दिल्ली के सिंधु बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया गया है। बैठक में पार्टी ने संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट जाने की अपील की गई। 

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किसान रैली - फोटो : amar ujala
किसान आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को देहरादून जिले के डाकपत्थर में सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया था। पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने कहा था कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। किसानों की आवाज को अनसुना किया जा रहा है।
 
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता किसानों के साथ जुड़ा हुआ है। कांग्रेस उनकी आवाज को बुलंद करने का काम करेगी। किसान बीते एक माह से दिल्ली की सड़कों पर धरना दे रहे हैं। जनता इसका बदला लेकर रहेगी।
 
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
हरिद्वार में पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने कहा है कि किसान आंदोलन केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए बल्कि सरकारी खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। जारी बयान में उन्होंने कहा कि उत्तरीय औद्योगिक देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाड़ा और यूरोपीय समुदाय के देश उष्ण कटि बंधीय फसलों को नही उगा सकते।
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किसान रैली - फोटो : amar ujala
उन्होंने कहा है कि ये देश इन उत्पादों के निर्यात के लिए विकासशील देशों पर लगातार दबाव बनाया कि वे खाद्यान्न उनसे खरीदें, भले ही उनकी सार्वजनिक वितरण प्रणाली नष्ट हो जाए। अंबरीष कुमार ने कहा कि भारत के किसानों ने कांट्रेक्ट फार्मिंग का स्वाद चख लिया हैं। उनका स्पष्ट कहना हैं कि वो शक्तिशाली संवेदन शून्य और निजी कंपनियों से व्यापार नहीं करना चाहते। 
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