रुद्रपुर गल्ला मंडी में धान के समर्थन मूल्य दिलाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह को वर्ष 1965 में पाक युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का अमेरिका के खिलाफ शुरू किए गए उपवास की यादें ताजा हो गईं।
किसान त्रिलोचन सिंह ने बताया कि वह बंगाल इंजीनियर्स में लांसनायक के रूप में तैनात थे। वर्ष 1965 में जब पाकिस्तान के साथ जंग चल रही थी तो अमेरिका का पाक को समर्थन कर रहा था।
इस कारण अमेरिका ने भारत के लिए गेहूं का निर्यात बंद कर दिया था, जिससे भारत में अचानक अनाज की कमी हो गई थी। उस अनाज संकट के खिलाफ अपना सहयोग करने के लिए उस समय उरी (जम्मू कश्मीर) में सभी सैनिकों ने सोमवार को भोजन न करने के लिए उपवास रखना शुरू किया।
उपवास रखने वाले सैनिकों में वह भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि उस समय विदेशी ताकतों के खिलाफ उपवास रखने वाले सैनिक को आज किसान के रूप में अपने ही हुक्मरानों के खिलाफ भूख हड़ताल करनी पड़ रही है।