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केदार नगरी में आस्था का सैलाब, आपदा के जख्म पड़े फीके

Sat, 25 Apr 2015 02:10 AM IST
केदारनाथ से विनय बहुगुणा
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बाबा केदार के कपाट के खुलने के दौरान जुटी श्रद्धालुओं की भीड़ ने आपदा के जख्मों को जैसे भर दिया है। बाबा के दर्शनों के लिए हर उम्र और कई प्रांतों के चार हजार से अधिक लोग मौजूद थे।
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हालांकि शाम के वक्त यह संख्या छह हजार से अधिक पहुंच गई थी। श्रद्धालु प्रात: 5.30 बजे से ही लाइन में खड़े होने लगे थे। कपाट खुलने की शुभ घड़ी निकट आने तक करीब तीन सौ मीटर लंबी लाइन लग चुकी थी। इस मौके पर केदारपुरी बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी।

वर्ष 2013 की आपदा के बाद यह पहला मौका था जब बाबा केदारनाथ के कपाट खुलने पर इतनी भीड़ थी। शुक्रवार को केदारपुरी में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास नजर आ रहा था। मुख्यमंत्री हरीश रावत मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही बाबा केदार के जयकारे लगाने लगे।
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भजनों से भक्तिमय हुआ धाम का माहौल

कपाट खुलने के मौके पर मंदिर परिसर में संस्कृति विभाग की टीम ने ‘जै हो त्रिजुगीनारायण’ सहित कई भजनों की प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर धाम में दर्शनों के लिए पहुंचे कुछ संन्यासी और अन्य भक्त भी झूमते रहे।

वहीं मुख्य गेट के समीप नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के सदस्य भगवान शिव के भजन गाते रहे। 6 कुमाऊं रेजीमेंट के गढ़वाली-कुमाऊंनी और भक्तिमय बैंड धुनों पर सीएम सहित वहां मौजूद कई भक्त भी थिरकते दिखे।

गिरते-गिरते बचे रावल
कपाट खुलने पर मुख्य द्वार से प्रवेश करने के लिए धक्कामुक्की भी देखने को मिली। स्थिति यह रही कि रावल भीमाशंकर लिंग मंदिर से पूजा कर बाहर निकले तो भीड़ के धक्के  से वे लड़खड़ा गए। पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने उन्हें संभाला। बाद में पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर लोगों को दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश करने दिया।

भक्तों की भीड़ में फंसे राहुल गांधी

कपाट खुलने पर प्रात: 9 बजे राहुल गांधी बाबा केदार के दर्शनों के लिए मुख्य द्वार पर पहुंचे। इस दौरान वहां पहले से ही भारी भीड़ मौजूद थी। करीब दो मिनट तक राहुल भी भीड़ के बीच फंस गए। बाद में आईजी संजय गुंजयाल, एसपीजी और एसपी रुद्रप्रयाग व पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद की मदद से राहुल ने मंदिर में प्रवेश किया। उन्होंने करीब 15 मिनट पूजा की।

हाई प्रोफाइल संचार व्यवस्था के दावे हवा
रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने केदारनाथ में 24 अप्रैल से वाई-फाई सहित इंटरनेट सुविधा मुहैया कराने का दावा किया था। शुक्रवार को ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला। प्रशासन से पूछने पर जवाब भी नहीं मिला।

भोजन के लिए भटकते रहे
शासन-प्रशासन की ओर से यात्रियों के लिए भोजन व्यवस्था के दावे कपाट खुलने की पहली रात धरे रह गए। लिनचौली में पांच सौ लोगों के ठहरने का दावा किया था। लोगों को हट्स में ठहराया तो गया, लेकिन वहां जीएमवीएन की ओर से खाने की उचित व्यवस्था नहीं थी। यहां सवा आठ बजे तक खाना खत्म होने की बात कही गई।

रात नौ बजे बाद एसडीआरएफ के जवानों ने आलू की तरकारी और पूरी बनाकर लोगों को खिलाई। धाम में भी शुक्रवार को जीएमवीएन के लंगर में खाने की व्यवस्था नहीं थी। यहां भी निम ने छोले, सूजी के साथ गेहूं और मंडुवे के आटे की पूरियां बनाकर खिलाई। निम ने श्रद्धालुओं के लिए गर्म और ठंडे पानी के साथ चाय, कॉफी की व्यवस्था भी की।
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रामबाड़ा पहुंचने पर भावुक हुए कई श्रद्धालु

वर्ष 2013 में जून के पहले सप्ताह महाराष्ट्र के नासिक से केदारनाथ यात्रा पर आए प्रिया पवार, दीप पवार और उत्कर्ष पवार का कहना था कि उन्होंने अपने परिवार के साथ रामबाड़ा में रात्रि विश्राम किया था। इस बार यहां सिर्फ मलबा नजर आ रहा है। रामबाड़ा का निशान तक नहीं है।

कर्नाटक के मैसूर से पहुंचे दीपांशु का कहना था कि वे दो वर्ष पहले केदारनाथ की यात्रा में आए थे, उस समय अपने मित्रों के साथ वह रामबाड़ा में रुके। यहां फोटो भी खिंचवाए। अब रामबाड़ा सिर्फ यादों में रह गया है।

चार किमी रास्ते में बर्फ ही बर्फ
लिनचौली से केदारनाथ के बीच चार किमी से अधिक रास्ता बर्फ के बीच से गुजरता है। यहां निम ने 5 से 12 फीट तक ऊंचे हिमखंडों को काटकर रास्ता बनाया है। यह पूरा क्षेत्र बर्फ के बुग्याल के रूप में है। जहां हल्की सी चूक कई मीटर गहरी खाई में पहुंचा सकती है।
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