एक घंटे तक उनकी निगरानी की गई तो सब कुछ सही मिला। इसके बाद करीब 34 और घोड़ा-खच्चर संचालकों को यात्रा मार्ग के लिए रवाना किया गया। 28 पर यात्री सवार हुए जबकि छह पर सामान भेजा गया। अब इनका संचालन रोज डॉक्टरों की निगरानी में किया जाएगा।
जबकि जो जानवर बीमार हैं उनका प्राथमिकता से इलाज किया जा रहा है। उन्होंने सभी पशुपालकों से यात्रा का संचालन पशु मानकों के तहत करने का आह्वान किया। आने वाले दिनों में और स्वस्थ्य घोड़ा-खच्चरों का संचालन शुरू किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यहां करीब 5000 से अधिक घोड़ा-खच्चर संचालक पंजीकृत हैं। इनसे से करीब 60 प्रतिशत घोड़ा संचालक लौट चुके हैं।