हाईवे को किया जाएगा सुरक्षित
इस विधि से भूस्खलन व भूधंसाव रुकने के साथ ही मिट्टी की परत मजबूत होगी। यही नहीं, पूरे हिस्से में बरसाती पानी की निकासी के लिए अलग-अलग स्तर पर तीन निकास नालियां भी बनाई जा रही हैं। भूस्खलन व भूधंसाव को रोकने के लिए चार स्तर पर रॉक एंकरिंग करते हुए गेविन वॉल भी बनाई गई हैं, जो नदी तल से मिट्टी के कटाव को रोकने का काम करेगी। आगामी मार्च तक यह कार्य पूरा होने की उम्मीद है। भूस्खलन व भूधंसाव जोन की मरम्मत से हाईवे पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा।
भूस्खलन रोकने में कारगर साबित हो रही रॉक एंकरिंग
भूधंसाव व भूस्खलन जोन में मिट्टी की परत को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्र में रॉक एंकरिंग तकनीक कारगर साबित हो रही है। इस विधि में प्रभावित क्षेत्र में अलग-अलग हिस्सों में तीन से चार मीटर गहरे छेद कर लोहे की रॉड डाली जा रही है। इसके बाद छेदों को कंक्रीट व सीमेंट के घोल से बंद किया जा रहा है, जिससे रॉड को मजबूती मिल रही है। इसके बाद पूरे क्षेत्र में स्टील के तारों से बनी जाली लगाई जा रही है, जिससे सभी लोहे की छड़ों को एक-एक कर जोड़ा जा रहा है। यह जाली भूस्खलन व भूधंसाव को रोकेगी। साथ ही हाइड्रोसीडिंग विधि से अगले दो-तीन माह में यह क्षेत्र हरा-भरा हो जाएगा।
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जवाड़ी बाईपास पर भूधंसाव रोकने के लिए सॉयल एंड रॉक एंकरिंग तकनीक से ट्रीटमेंट का कार्य 60 फीसदी से अधिक हो चुका है। उम्मीद है कि आगामी मार्च तक कार्य पूरा हो जाएगा। -प्रेरणा जगुड़ी, प्रभारी अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड, लोनिवि रुद्रप्रयाग