करीब दो महीने बाद बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो जाएगी। यात्रा तैयारियों के लिए शासन और प्रशासन के पास समय बहुत कम और चुनौतियां ज्यादा हैं। जल प्रलय से तबाह हुए केदारनाथ हाईवे और पैदल यात्रा मार्ग को चलने लायक बनाना है।
वर्तमान में परिस्थिति ऐसी है कि बर्फ जमी होने के कारण भीमबली से ऊपर पैदल मार्ग पर काम करना मुश्किल है।
भीमबली से केदारनाथ तक अप्रैल माह से शुरू हो पाएगा। ऐसे हालात में एक माह में पैदल मार्ग की मरम्मत होनी मुश्किल है।
अभी नहीं खुल पाए हैं रास्ते
पिछले वर्ष 16/17 जून को आए जलप्रलय से पूरी केदार घाटी में भारी तबाही मची थी। 76 किलोमीटर लंबे केदारनाथ राजमार्ग की हालात रुद्रप्रयाग से ही खराब है।
कई स्थानों पर सड़क के ऊपर और नीचे दोनों ओर से खिसकने का खतरा है। गौरीकुंड तक अभी सड़क नहीं खुल पाई है। सड़क की खराब स्थिति के कारण कई स्थानों पर जाम लग रहा है।
गत वर्ष लोनिवि ने पैदल मार्ग को अस्थायी रुप से खोला था। रामबाड़ा से मार्ग को दूसरी ओर ले जाना पड़ा।
ठेकेदार नहीं दिखा रहे रुचि
इसी माह लोनिवि ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए हैं।
गत वर्ष काम कराने के बाद भुगतान न होने और विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए ठेकेदार कम रुचि दिखा रहे हैं। जिसके चलते दो माह में काम पूरा होना मुश्किल है।
इन दिनों मौसम भी अकसर खराब हो रहा है। धाम में बर्फ गिर रही है, तो निचले इलाकों में बारिश। यदि मजदूरों को काम पर लगाया भी जाता है, तो तेजी से काम नहीं कर पाएंगे। पैदल मार्ग पर लोनिवि हजार से ज्यादा मजदूर काम पर लगाएगी, तभी तेजी से काम हो पाएगा।
ठहरने और खाने की व्यवस्था करना भी मुश्किल
केदार धाम में स्थित दर्जनों होटल, लॉज, प्रसाद की दुकानें, रेस्टारेंट और धर्मशालाएं ध्वस्त हो गई थी। कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों में अभी भी मलबा भरा है जिससे यहां ठहरने और खाने के स्थान कम हो गए हैं।
हालांकि प्रशासन की तरफ से पिछले वर्ष मंदिर से करीब डेढ़ किमी दूर 10 प्री फेब्रिकेटेड हट्स बनाए गए हैं। वर्तमान में इनकी स्थिति रहने लायक है या नहीं, यह बर्फ पिघलने के बाद ही पता चल पाएगा।
सोनप्रयाग से लेकर धाम तक मंदाकिनी नदी की बाढ़ में गौरीकुंड बाजार का निचला हिस्सा और रामबाड़ा बाजार बह गए थे। प्रशासन के सामने मार्ग पर यात्रियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्थाएं करना भी बहुत बड़ी चुनौती होगी।
धाम तक कैसे पहुंचेगी बिजली
धाम में बिजली की आपूर्ति करना भी ऊर्जा निगम के लिए मुश्किल होगा। लिनचोली से ऊपर धाम तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई थी। ऊर्जा निगम को यहां लाइन का एलाइमेंट बदलना पडे़गा। जिसमें काफी वक्त लग जाएगा।
गत वर्ष मंदिर और अस्थायी ठिकानों में उरेडा के माइक्रो हाइडिल प्रोजेक्ट से बिजली आपूर्ति की गई थी। लेकिन लोड बढ़ने पर यह काम नहीं आई।
व्यापारियों की करनी होगी मदद
आपदा ने व्यापारियों का रोजगार छीन लिया। आपदा के कारण अधिकतर व्यापारियों की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह दोबारा व्यापार शुरू कर सके। ऐसे में वह भी सरकार की ओर मदद के लिए टकटकी लगाए हुए हैं।