केदारनाथ धाम को अगली यात्रा के पहले पूरी तरह से बसाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मंगलवार को सचिवालय में केदारनाथ के पुनर्निर्माण व पुनर्वास के फेज-2 की कार्ययोजना की बैठक कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
तय समय सीमा में केदारनाथ व केदारनाथ मार्ग पर प्रभावितों के पुनर्वास का काम पारदर्शिता व निष्पक्षता से स्वतंत्र रूप से हो सके इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में रिसेटलमेंट आयोग गठित किया जाएगा।
इस मौके पर जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग ने स्क्रीन पर एक प्रेजेंटेशन भी दिखा आसपास सरकारी और निजी भूमि की जानकारी दी।
सीएम ने अधिकारियों से कहा कि पुनर्निर्माण व पुनर्वास में श्रीकेदारनाथ मंदिर की गरिमा सुनिश्चित की जाए। पुनर्वास व पुनर्निर्माण कार्य वैज्ञानिक ढंग से किए जाएं।
करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी
केदारनाथ मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हैं इसलिए कार्ययोजना में धार्मिक मान्यता व परंपराओं का भी ध्यान रखा जाए।
सीएम ने स्पष्ट किया है तीर्थ पुरोहितों के पुनर्वास में उनकी सलाह ली जाए और उनके जरूरी हितों को सुनिश्चित किया जाए। केदारनाथ मंदिर के चारों ओर के परिसर को इस तरह से विकसित किया जाए कि भविष्य में मंदिर व श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कमी न रहे।
बैठक में सलाहकार इंदु कुमार पांडे, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव एसएस. संधू, सचिव भास्करानंद, मोहम्मद शाहिद, अमित नेगी, डीएम रुद्रप्रयाग डा.राघव लांगर आदि अधिकारी मौजूद थे।
कुछ ऐसा खींचा गया खाका
- मंदाकिनी व सरस्वती नदियों के बीच में पूरी प्लानिंग के साथ ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण किया जाए।
- मंदिर को तीन स्तरीय सुरक्षा दीवार से सुरक्षा दी जाए।
-जीएसआई की मदद के साथ ही कंसल्टेंसी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीडिंग की जाए।
- कार्ययोजना इस प्रकार की बनाई जाए कि मंदिर दूर से ही स्पष्ट दिखाई दे।
- केदारनाथ में प्रवेश के लिए बनाए गए पुल से लेकर मंदिर तक कोई अवरोध न हो। इस बीच में गलियारे को खुला रखा जाए।
- शेष भूमि पर तीर्थ पुरोहितों के पुनर्वास के लिए बातचीत की जाए और उसने संबंधित हर निर्णय में तीर्थपुरोहितों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
- मंदिर के पीछे की तरफ कोई निर्माण नहीं किया जाए।
- सरस्वती व मंदाकिनी नदियों में स्थायी प्रकृति के रिवर ट्रेनिंग की कार्ययोजना लक्ष्य रखा जाए कि केदारनाथ आपदा में जिस गति का फ्लश फ्लड आया था उसे रोकने की क्षमता हो।
- सिंचाई विभाग घाट निर्माण का काम शुरू कर दे।
- छोटा लैंनचोली से बड़ा लैंचोली तक के क्षेत्र को रामबाड़ा के विकल्प के रूप में विकसित किया जाए।
- समूचे केदारनाथ मार्ग पर जो भी व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर रेस्टोरेंट, ढाबा या अन्य व्यावसायिक काम करना चाहता है उसे सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाकर प्रोत्साहित किया जाए।
- गौरीकुंड से केदारनाथ मार्ग को जहां भी जितना भी संभव हो चौड़ा किया जाए।
- जगह-जगह पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए उचित प्रबंध किए जाएं।
- अधिक हिमपात से केदारनाथ मार्ग बंद हो जाता है। बर्फ को हटाने के लिए आवश्यक संख्या में स्नो-ब्लोअर खरीदे जाएं।