प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2018 में मंदिर के पीछे आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल का पुनर्निर्माण भी शुरू किया गया था। तब प्रधानमंत्री ने धाम पहुंचकर कहा था कि आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल केदारनाथ मंदिर की तरह दिव्य और भव्य होगा।
भगवान केदारनाथ के कपाट खुलने पर मंगलवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी लेकिन ठीक पीछे आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल सूना पड़ा रहा। एक तरह जहां केदारनाथ मंदिर को 35 क्विंटल फूलों से सजाया गया था तो दूसरी ओर शंकराचार्य समाधि स्थल पर एक फूल भी नहीं चढ़ा। जबकि मंगलवार को आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती थी। आदि गुरु शंकराचार्य की उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए ज्योतिषपीठ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज धरने पर बैठ गए। प्रशासन व बीकेटीसी के मनाने पर मामला शांत हुआ।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2018 में मंदिर के पीछे आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल का पुनर्निर्माण भी शुरू किया गया था। तब प्रधानमंत्री ने धाम पहुंचकर कहा था कि आदिगुरु शंकराचार्य का समाधि स्थल केदारनाथ मंदिर की तरह दिव्य और भव्य होगा। लेकिन, तीन चरणों में 16 करोड़ की लागत से बने समाधि स्थल को केदारनाथ में भुला दिया गया। उपेक्षा से नाराज ज्योतिषपीठाधीश्वर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज समाधि के समीप धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य सनातन धर्म के ध्वजवाहक रहे हैं। यह उपेक्षा किसी भी स्तर पर माफी योग्य नहीं है।
सूचना पर बीकेटीसी के सीईओ योगेंद्र सिंह, अपर कार्याधिकारी आरसी तिवारी सहित अन्य लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह शंकराचार्य को मनाया। धाम में मौजूद धार्मिक मामलों के जानकार बृजेश सती ने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य को इस तरह भुला दिया जाएगा यह कभी कल्पना नहीं की थी। समाधि क्षेत्र में सफाई भी नहीं की गई थी। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि पूरे मामले की समिति के अधिकारियों से जानकारी ली जा रही है।