साल 2013 में केदारनाथ जलप्रलय के बाद रामबाड़ा में बिजली के पोलों पर बनाए गए अस्थायी पुल से हुई आवाजाही 2014 के अप्रैल माह तक जारी है।
ये दो उदाहरण ही लोनिवि की रफ्तार का खाका खींच देते हैं जबकि 2013 में ही रामबाड़ा में स्थायी पैदल पुल का निर्माण होना था।
एनआईएम, जल संस्थान और ऊर्जा निगम के मजदूर इसी कच्चे पुल से निर्माण सामग्री ले जा रहे हैं जो खतरनाक है। हालांकि अब लोनिवि एक हफ्ते में पुल बनाने का दावा कर रहा है।
पैदल मार्ग जगह-जगह ध्वस्त
जल प्रलय में केदारनाथ पैदल मार्ग जगह-जगह ध्वस्त हो गया था। रामबाड़ा से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर पुन: आवाजाही की संभावनाएं खत्म हो गई।
ऐसे में रामबाड़ा में नदी पार कर दूसरी ओर जाने का विकल्प शेष बचा था। त्वरित राहत के लिए ठीक नदी तल से अस्थायी पुल का निर्माण किया गया, लेकिन यह बहुत खतरनाक था।
तब इसी स्थान से करीब 20 मीटर नीचे लोनिवि बिजली के पोल, तार और अन्य सामग्री से अस्थायी पुल बनाया। आज भी इसी पुल से आवाजाही हो रही है। यह पुल सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।
एक साल में स्थिति वही
लोनिवि द्वारा पिछले साल ही यहां नए स्थायी पुल का निर्माण करने की बात कही गई थी, लेकिन पुल का निर्माण नहीं किया गया।
नवंबर माह में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। इस साल भी यही स्थिति है। अभी तक पुल की पूरी सामग्री रामबाड़ा तक नहीं पहुंची है।
पुल के एबेटमेंट बनाने की रफ्तार बहुत धीमी है जबकि लोनिवि की एक पूरी डिवीजन पैदल मार्ग का निर्माण कार्य देख रही है।
हार्ड रॉक पर नहीं हो रहा पुल निर्माण
इन दिनों मंदाकिनी नदी का जल स्तर काफी कम है। इसके बावजूद पुल के बनाए जा रहे पुस्ते को पानी छू रहा है। बरसात में जब पानी बढे़गा, तब क्या होगा। पुल का निर्माण कच्चे स्थान पर किया जा रहा है।
जबकि इससे करीब 100 मीटर नीचे मंदाकिनी नदी के दोनों ओर हार्ड रॉक मौजूद है और नदी भी बहुत नीचे है। यहां पुल निर्माण सुरक्षित हो सकता था।
एक हफ्ते में बन जाएगा पुल: सीई
स्थायी पुल की ऊंचाई साढे़ चार मीटर और लंबाई 18 मीटर है। पुल सुरक्षित है। पुराना अस्थायी पुल भी पक्का है। इससे प्रतिदिन 700 लोगों की आवाजाही हो रही है। पुल की निर्माण सामग्री साइट पर पहुंचा दी गई है। एक सप्ताह में पुल का निर्माण हो जाएगा।