यात्रा को मिला आयाम
आपदा के बाद बीते एक दशक में केदारनाथ यात्रा को नया आयाम मिला है। आपदा के अगले वर्ष 2014 में बाबा केदार के दर्शन को सिर्फ 48 हजार श्रद्धालु पूरे यात्राकाल में धाम पहुंचे। इसके बाद, लोगों में विश्वास बढ़ा और यात्रा वर्ष दर वर्ष अपनी रफ्तार पकड़ने लगी। वर्ष 2019 में पहली बार धाम में दर्शनार्थियों का आंकड़ा दस लाख के पार पहुंचा। इसके बाद अगले दो वर्ष कोरोनाकाल में यात्रा सीमिति रही, लेकिन 2022 में बाबा केदार की यात्रा को नया आयाम मिला और दर्शनार्थियों का आंकड़ा 15 लाख के पार पहुंचा। वहीं, 2023 में 19 लाख और 2024 में 16 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये। इस वर्ष भी 46 दिनों में यात्रा में 10 लाख 80 हजार से अधिक श्रद्धलु केदारनाथ में दर्शन कर चुके हैं।
अब भी दुश्वारियां तमाम ...
आपदा के 12 वर्ष बाद भी कई दुश्वारियां हैं, जिनका निस्तारण नहीं हो पाया है। केदारनाथ तक पहुंच के लिए सुरक्षित पैदल मार्ग बड़ी चुनौती बना है। पुराने रास्ते का पुनरोद्धार कार्य हो रहा है, पर कब पूरा होगा, कहना मुश्किल है। वहीं, वैकल्पिक मार्गों के लिए कार्ययोजना नहीं बन पाई है। आपदा पीड़ितों के हक-हकूकों के लिए नीति नहीं बन पाई है। साथ ही आपदा से प्रभावित गांवों की सुरक्षा आज भी भगवान भरोसे है।
अकेले जीवन जीने को मजबूर कई लोग
केदारनाथ आपदा में सबसे ज्यादा जनहानि केदारघाटी के देवली भणिग्राम में हुई थी। यहां 54 लोग काल का ग्रास बन गये थे। कई परिवारों की तीन-तीन पीढ़ियां आपदा में खत्म हो गई थी। आज भी यह परिवार इस दर्द से उभर नहीं पाए हैं। हां इतना जरूर है कि यहां की मातृशक्ति ने स्वयं कमर बांधकर आत्मनिर्भर होने का संकल्प लिया है। हस्तशिल्प के कार्य से महिलाएं अपनी आर्थिकी को नया रूप दे रही है।