वोटों को सदस्यता में बदलने का जिम्मा
भट्ट ने प्रत्येक विधायक को उसी विधानसभा में लोकसभा चुनाव में मिले कुल प्राप्त वोटों को सदस्यता में तब्दील करने का भी टाॅस्क दिया है। शैलारानी रावत के निधन के बाद केदारनाथ सीट खाली है, इसलिए इस सीट पर वोटों को सदस्यता में बदलने का जिम्मा मंत्रियों से लेकर पार्टी पदाधिकारियों के कंधे पर है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा को केदारनाथ सीट पर 30,536 वोट प्राप्त हुए थे, जो 2022 में कुल प्राप्त 21,866 वोटों से अधिक हैं। इस लिहाज से इस सीट पर लोस में कांग्रेस को 20,164 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने भी विस में प्राप्त 12,557 वोटों की तुलना में अपने वोटों में खासा इजाफा किया। इस सीट पर 13,423 वोट निर्दलीय कुलदीप रावत को मिले थे, जो अब भाजपा में हैं।
बदरीनाथ उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद से कांग्रेस खासी उत्साहित है, इसलिए पीसीसी से लेकर एआईसीसी तक का केदारनाथ चुनाव पर फोकस है। पार्टी इस उपचुनाव में माहौल बनाने के लिए फिर से यात्रा शुरू करने की तैयारी में है।
भाजपा भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी
भाजपा भी इस सीट पर कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। उसका तर्क है कि बदरीनाथ सीट उसके कब्जे वाली नहीं थी, लेकिन केदारनाथ पर पहले से उसका कब्जा है। पार्टी संगठन और सरकार के स्तर पर हर जोर कोशिश करेगी। इसके लिए सरकार के पांच मंत्रियों सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा और रेखा आर्य को मैदान में उतार दिया गया है। आचार संहिता लागू होने से पहले उन्हें पार्टी पदाधिकारियों के साथ मिलकर मंडल स्तर पर स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान करना है और उन्हें पार्टी के पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित करना है।
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