सर्दियों में काम धंधा चौपट होने पर जम्मू कश्मीर के हजारों खेतीहर मजदूर उत्तराखंड और यूपी क्षेत्र की चीनी मिलों में मजदूरी कर रहे हैं।
चार माह में प्रत्येक मजदूर करीब 55 हजार रुपए लेकर अपने घर वापस लौटता है। इन सभी मजदूरों के कश्मीर में सेब के बगीचे हैं। बाजपुर चीनी मिल में यूपी के स्वार (रामपुर) निवासी ठेकेदार के माध्यम से जम्मू कश्मीर के करीब 22 मजदूर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 7 साल पहले तीन मजदूर रोजगार की तलाश में यहां आए थे।
तब से धीरे-धीरे कश्मीर से लोग हर साल यहां आने लगे। भले ही वह अपना राज्य छोड़कर उत्तराखंड में काम कर रहे हैं, लेकिन उनका खानपान वही है। जम्मू कश्मीर के गांव मोहम्मदपुरा ताजीपुरा निवासी मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद अशरफ, गुलाम मेंहदीन, मोहम्मद इमरान, गांव नवगांव सुफियान निवासी अरशद ने अमर उजाला को बताया कि कश्मीर में नवंबर से फरवरी तक अधिक ठंड होती है।
जिसमें परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो जाता है। आर्थिक तंगी के चलते महिलाओं और बच्चों को घरों पर छोड़ हर साल शुगर मिलों में आकर काम करते हैं। चीनी मिल में प्रति मजदूर को 3.25 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से मजदूरी मिलती है।
दिनभर में 140 बोरी उठाकर गोदाम में चट्टा लगाते हैं। इधर मिल के सुरक्षाधिकारी ऋषिपाल सिंह ने बताया कि छह-सात कश्मीरी मजदूर अपने घरों को आते जाते रहते हैं।