एसएलपी मामला
न्याय विभाग उत्तराखंड राज्य बनाम उमेश कुमार शर्मा और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) वापस नहीं लेगा। न्याय विभाग ने एसएलपी मामले में कदम पीछे खींच लिए हैं। विभाग ने एक आदेश
2020 में हाईकोर्ट नैनीताल ने उमेश कुमार के खिलाफ दर्ज राजद्रोह का मुकदमा निरस्त करने और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। तब इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री और हरेंद्र सिंह रावत ने भी सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। ताजा घटनाक्रम में उपसचिव (न्याय) अखिलेश मिश्रा के माध्यम से जारी पत्र में जिक्र है कि अपर सचिव न्याय के 26 सितंबर 2022 में प्रेषित पत्र के तहत उत्तराखंड राज्य बनाम उमेश कुमार शर्मा और अन्य के मामले में याचिका वापस लेने का निर्णय लिया था। अब जनहित में इसे रद्द करने का निर्णय लिया गया है। एओआर को एसएलपी के मामले में पूर्व की यथास्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
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डीजीपी का फिर इस्तीफा मांगा
करन माहरा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड, वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं होने, केदार भंडारी की गुमशुदगी, यूकेएसएसएससी पेपर लीक और कानून व्यवस्था का सवाल उठाते हुए एक फिर से मुख्यमंत्री से डीजीपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
एनजीओ चला रहीं अधिकारियों की पत्नियां
पीसीसी अध्यक्ष माहरा ने कहा कि राज्य में नौकरशाहों की संपत्ति का ब्योरा मांगा जाना चाहिए। उनकी पत्नियों के नाम पर एनजीओ चल रहे हैं। सब समझते हैं कि ये एनजीओ कैसे चल रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। सीएस की बात पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें उन्होंने इशारा किया है, अधिकारी अपना काम ढंग से नहीं कर रहे हैं।
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सब नेता एक मंच पर एक साथ नहीं आ सकते
प्रीतम के सचिवालय कूच कार्यक्रम में शामिल नहीं होने के सवाल पर माहरा ने कहा कि एक वक्त में सब नेता एक साथ नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सभी लोग अलग-अलग मोर्चों पर डटकर पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। पार्टी में किसी तहर की गुटबाजी नहीं है।