बचपन बचाओ आंदोलन के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि युद्ध पीड़ित बच्चों के लिए हर देश के बॉर्डर खुले रखे जाएं। उनके लिए सीमाओं की बंदिश न हो। सत्यार्थी ने युद्ध से प्रभावित बचपन का भयावह आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि दुनिया भर के देशों में करीब 23 करोड़ बच्चे अपना घर परिवार खो चुके हैं।
सत्यार्थी ने शनिवार को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह के बाद मीडिया से कहा कि बच्चों की खुशहाली से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है। किसी भी देश में युद्ध होने पर सबसे ज्यादा विभीषिका बच्चों को झेलनी पड़ती है।
हाल के दिनों में कुछ देशों में शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे बंद करने की तरफ इशारा करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि जिन देशों में लगातार युद्ध चल रहे हैं, वहां से जान बचाने के लिए लोग दूसरे देशों में पनाह चाहते हैं। कहा कि बच्चों के लिए सभी देशों को अपनी सीमाएं खोल देनी चाहिए।
दुनिया के सामने आतंकवाद और हिंसा रोकने की बड़ी चुनौती है। भारत में बालश्रम, भिक्षावृत्ति को अभिशाप बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी बच्चों के हालात ज्यादा बेहतर नहीं हैं। कहा कि हमारे देश में 10 करोड़ बच्चे बाल्यावस्था में ही भूखे सोने को मजबूर होते हैं। सरकार और समाज को ऐसे बच्चों के लिए गंभीरता से प्रयास करने चाहिए।