कैलाश मानसरोवर यात्रियों के सामान ढुलान संबंधित कुमाऊं मंडल विकास निगम की निविदा पर रोक को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बरकरार रखा है। पूर्व में एकलपीठ ने निविदा प्रक्रिया पर रोक का आदेश जारी किया था। एकलपीठ के इसी आदेश को स्पेशल अपील के जरिए निगम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों की करीब 85 किलोमीटर की पदयात्रा के दौरान यात्रियों के सामान को खच्चरों से ढोया जाता है। इस बार भी यात्रियों के सामान को खच्चरों से ढोने के लिए निगम ने ऑनलाइन निविदा जारी की थी।
इसी निविदा को एक निविदाकर्ता कुंदन सिंह भंडारी ने हाईकोर्ट की एकलपीठ में चुनौती दी थी। कुंदन सिंह का कहना था कि निगम ने न्यूनतम दर के आधार पर पहले निविदा उनके नाम खोली। बाद में निगम ने दूसरे निविदाकर्ता अशोक सिंह को यह ठेका कम दर पर दे दिया।
निगम प्रबंधन का यह फैसला ऑन लाइन बिडिंग प्रणाली के विपरीत है। एकलपीठ ने इसी याचिका पर सुनवाई के बाद निविदा पर रोक लगा दी थी। इसी फैसले को निगम ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील के जरिए चुनौती दी थी। कैलाश मानसरोवर यात्रा 12 जून से शुरू हो चुकी है। ऐसे में सामान ढुलान की निविदा पर रोक से यात्रा का संचालन कर रहे केएमवीएन को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।