फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेजपाल अंदर, क्यों जेपी जोशी बाहर?

Mon, 02 Dec 2013 09:19 PM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
रिटायर्ड जस्टिस, पत्रकार व नौकरशाही। तीनों वर्गों से देश में एक साथ एक ही तरह के तीन मामले सामने आए। तरुण तेजपाल गिरफ्तार हो गए, गांगुली पर भी शिकंजा कस गया और अपर सचिव जेपी जोशी पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रहे हैं। इतना ही एक प्रभावशालीनेता व कुछ अफसर मैनेजमेंट में भी लगे हैं।
विज्ञापन


कोई मजबूरी नहीं
हालांकि विधिक रूप से ऐसी कोई मजबूरी नहीं है कि परिस्थितिजन्य मामलों में अभियुक्त को विवेचना से पहले गिरफ्तार किया जाए। लेकिन एक ही जैसे मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल जेल पहुंच गए, लेकिन अपर सचिव जेपी जोशी से पुलिस केवल बयान भर ले सकी।

जोशी अभी भी शिकंजे से बाहर
यदि इनके स्थान पर कोई सामान्य व्यक्ति होता तो शायद ही पुलिस इतना इंतजार करती। लेकिन जोशी अभी भी पुलिस के शिकंजे से बाहर है। हालांकि जिस दिन पीएचक्यू ने यह जांच अपनी निगरानी में ली थीं तभी यह आभास हो गया था कि विवेचना समाप्त होने से पहले जोशी की गिरफ्तारी होना मुश्किल है। और, हुआ भी वही।
विज्ञापन


सवाल यही है जब तरुण तेजपाल गिरफ्तार हो सकते हैं तो इसी तरह केमामले में अपर सचिव जेपी जोशी क्यों बाहर घूम रहे है। बस इतना ही फर्क तो है कि इस मामले में क्रास एफआईआर हुई है। बाकी सभी धाराएं तो दोनों में समान ही है।

जोशी नहीं आए, छुट्टी बढ़ाने का पत्र भेजा
यौन शोषण के मामले में घिरे अपर सचिव जेपी जोशी छुट्टी समाप्त होने के बाद भी ऑफिस नहीं आए। उन्होंने अपनी छुट्टियां 31 दिसम्बर बढ़ाने का आवेदन सचिवालय प्रशासन की सचिव हेमलता ढौंडियाल को भेजा है।

अपर सचिव जेपी जोशी की मेडिकल लीव तीस नवम्बर तक थीं। इसके बाद शनिवार व रविवार को सचिवालय बंद रहता है। इस हिसाब से सोमवार को जेपी जोशी को ज्वानिंग देनी थी। लेकिन वह दफ्तर नहीं आए और मीडिया वालों की निगाह दिन भर उनके कार्यालय पर लगी रही।
विज्ञापन


खबरनवीस उनके दफ्तर के आस पास ही मंडराते रहे। जोशी तो नहीं आए लेकिन उन्होंने दोपहर में एक प्रत्यावेदन 31 दिसम्बर तक छुट्टी बढ़ाने के लिए भेजा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें