रोपवे के संचालन में जोशीमठ से औली तक मैनेजर ऑपरेशन के अलावा 20 लोग रोजगार से जुड़े हैं। यदि लंबे समय तक इसका संचालन ठप रहता है तो कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो जाएगा।
जोशीमठ-औली रोपवे का भविष्य वैज्ञानिकों की रिपोर्ट पर टिका हुआ है। रोपवे के ईद-गिर्द खेतों में दरारें आने से चार जनवरी से इसका संचालन बंद है। इसका संचालन पिछले 28 साल से गढ़वाल मंडल विकास निगम की ओर से किया जा रहा है।
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रोपवे के संचालन में जोशीमठ से औली तक मैनेजर ऑपरेशन के अलावा 20 लोग रोजगार से जुड़े हैं। यदि लंबे समय तक इसका संचालन ठप रहता है तो कर्मचारियों के सामने रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो जाएगा।
रोपवे कर्मी ऋषिपाल का कहना है कि वे भी 28 साल से यहां काम कर रहे हैं यदि रोपवे का संंचालन नहीं होता है तो परिवार चलाना मुश्किल हो जाएगा। जोशीमठ के भू-धंसाव क्षेत्र मनोहर बाग वार्ड में रोपवे का प्लेटफार्म स्थित है। सबसे पहले मनोहर बाग में ही मकानों और खेतों में दरारें पड़ी थीं।
रोपवे के टावर नंबर एक के निचले खेत में भी करीब सात इंच मोटी दरार पड़ी, इसके बाद चार जनवरी को प्लेटफार्म के ऊपरी हिस्से के खेत में 20 फीट लंबी, 4 फीट गहरी और 5 इंच मोटी दरार पड़ी, जिसके बाद रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया।
रोपवे के मैनेजर ऑपरेशन दिनेश भट्ट का कहना है कि रोपवे का संचालन कब शुरू होगा यह वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद ही कहा जा सकता है। चार जनवरी के बाद कोई नई दरारें नहीं आई हैं। रोपवे प्लेटफार्म में लाखों की मशीनें हैं, जिन्हें सुरक्षित रखा गया है।