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Joshimath: बारिश के बाद घरों और खेतों में पड़ी पुरानी दरारें बढ़ीं...होटलों के डिस्मेंटल में लगेंगे 15 और दिन

Wed, 25 Jan 2023 08:06 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, जोशीमठ(चमोली)

सार

नगर के मनोहर बाग वार्ड में पुरानी दरारों को प्रशासन ने मिट्टी डलवाकर भरवा दिया था लेकिन बारिश के बाद मिट्टी बह गई और दरारें फिर नजर आने लगीं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल इस क्षेत्र में कोई नई दरार नहीं दिखी है।
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जोशीमठ में खेतों में बढ़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जोशीमठ नगर में भू धंसाव से जगह-जगह दरारें आई हुई हैं। हालांकि पिछले कुछ दिनों से यहां नई दरारें तो नहीं दिखी हैं लेकिन बारिश के बाद पुरानी दरारें जरूरी बढ़ गई हैं। जिन दरारों को प्रशासन ने मिट्टी डालकर भरा था वह फिर दिखने लगी हैं।

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नगर के मनोहर बाग वार्ड में पुरानी दरारों को प्रशासन ने मिट्टी डलवाकर भरवा दिया था लेकिन बारिश के बाद मिट्टी बह गई और दरारें फिर नजर आने लगीं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल इस क्षेत्र में कोई नई दरार नहीं दिखी है।
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मनोहर बाग वार्ड की गीता देवी परमार, मदन प्रसाद कपरुवाण ने बताया कि अब नई दरारें नहीं दिख रही हैं लेकिन जिन पुरानी दरारों को मिट्टी से भरवाया था वह बारिश के बाद जरूर बढ़ गई हैं। अब बार-बार बारिश होने से यहां खतरा बढ़ सकता है।

होटलों के डिस्मेंटल में लगेंगे 15 और दिन
माउंट व्यू और मलारी इन होटलों के डिस्मेंटल का काम जारी है। होटलों के मलबे से आसपास के भवनों को क्षति न पहुंचे, इसके लिए बड़ी सावधानी से भवनों को तोड़ा जा रहा है। 12 जनवरी से होटलों के डिस्मेंटल का काम शुरू हुआ था। सीबीआरआई के इंजीनियरों की देखरेख में होटल गिराए जा रहे हैं। डिस्मेंटल के काम की लगातार मॉनेटरिंग कर रहे लोनिवि प्रांतीय खंड गोपेश्वर के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पटवाल ने बताया कि अभी होटलों को पूरी तरह से डिस्मेंटल करने में 15 दिन का अतिरिक्त समय लग सकता है।

ये सात मंजिला होटल थे, जिनमें से अभी तक दोनों होटलों की लगभग 2-2 मंजिलें डिस्मेंटल कर दी गई हैं। सबसे ऊंचाई वाली मंजिलों को तोड़ने में दिक्कत थी, पूरी तरह से वैज्ञानिक विधि से होटलों को तोड़ा जा रहा है। अब निचली मंजिलों को तोड़ने में तेजी आ जाएगी। 

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पशुओं के लिए प्रीफेब्रिकेटेड काऊ शेड तैयार
नगर में भू धंसाव से प्रभावित परिवारों के मवेशियों के लिए पशुपालन विभाग ने सुनील वार्ड में प्रीफेब्रिकेटेड काऊ शेड बना लिया है। जिन पशुपालकों की गौशाला क्षतिग्रस्त हुई है उनके पशुओं को इस शेड में रखा जाएगा।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. प्रलयंकर नाथ ने बताया कि यह काऊ शेड सुरक्षित स्थान पर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित पशुपालकों को चारे के बैग वितरित किए जा रहे हैं। अभी तक 150 चारा बैग वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही पशु चिकित्सक प्रभावित क्षेत्र के पशुओं का निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे हैं। अभी तक 84 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है।

आपदा में सरकारी परिसंपत्तियों को भी हुआ करोड़ों का नुकसान
भू-धंसाव से सरकारी परिसंपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा नुकसान जल संस्थान को हुआ है। संस्थान की कई पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। विभाग की ओर से नई पेयजल योजनाओं के लिए शासन से 4 करोड़ 90 लाख रुपये की डिमांड की है। जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों में विभागों को हुए नुकसान का आंकलन कर शीघ्र इस्टीमेट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

भू-धंसाव से जल निगम को 40 लाख रुपये, जल संस्थान को 4 करोड़ 90 लाख रुपये, लोक निर्माण विभाग को 3 करोड़ 80 लाख रुपये, ऊर्जा निगम को 2 करोड़ 15 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। डीएम हिमांशु खुराना ने कहा कि आपदा से सरकारी परिसंपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है। इसका आंकलन किया जा रहा है। सीबीआरआई की रिपोर्ट के आधार पर असुरक्षित भवनों व योजनाओं का इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। सभी विभागों से इस्टीमेट मिलने पर उसे शासन को भेज दिया जाएगा।
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