अब राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम करने का नया प्रस्ताव भेजा जाएगा। कैबिनेट के इस फैसले को लेकर सियासी किचकिच होने के पूरे आसार हैं, कांग्रेस ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे दी है। दरअसल, जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर करने का कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का एक प्रस्ताव केंद्र के पास लंबित है।
कांग्रेस की तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से कुछ समय पहले ही जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर रखने का फैसला कैबिनेट से पारित कराया था। कांग्रेस सरकार का तर्क था कि देवभूमि में आदि गुरु शंकराचार्य रहे हैं। उन्होंने ही बदरीधाम की स्थापना की थी। ऐसे में राज्य के सबसे बड़े एयरपोर्ट का नाम शंकराचार्य के नाम पर ही होना चाहिए। कैबिनेट की मंजूरी के बाद तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से इस बारे में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार भेज दिया गया था। इस बारे में केंद्र की ओर से अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है। एयरपोर्ट का नाम बदलने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला केंद्रीय विमानन मंत्रालय की ओर से किया जाता है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम आदि गुरु शंकराचार्य के नाम पर करने का प्रस्ताव कांग्रेस सरकार की ओर से पहले ही केंद्र को भेजा जा चुका है। अब एक बार फिर से नाम बदलने का प्रस्ताव आदि गुरु शंकराचार्य का अपमान है।
- मथुरादत्त जोशी, मुख्य प्रवक्ता, उत्तराखंड कांग्रेस