जब एंकर ऋचा अनिरुद्ध के सवालों के बीच बात ‘मुक्काबाज’ और ‘मुक्केबाज’ के अंतर की आई तो कलाकार विनीत कुमार बोले, जब बाक्सर को कमतर बताना होता है, तो उसे मुक्काबाज कहा जाता है, कुछ यही फिल्म की कहानी में भी है।
वहीं, इसी सवाल के जवाब में बाक्सर अखिल कुमार ने कहा कि मुक्काबाज का एक पंच और मुकाबला खत्म हो जाता है। इन्हीं सवाल-जवाबों के साथ संवाद आगे बढ़ा और उत्तराखंड में खेल की सुविधा और संसाधनों पर बात आई।
बाक्सर अखिल कुमार कहते हैं कि उत्तराखंड से कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन किया, उसमें कई बाहर जाकर खेलते हैं। अगर, यहां पर राष्ट्रीय स्तर के कैंप का आयोजन हो और संसाधनों को बढ़ाया जाए तो खिलाड़ियों की संख्या बढ़ेगी।
विनीत बताते हैं कि मुक्काबाज की कहानी उन्होंने प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचने और फिर गुमनानी में गुम होने वाले खिलाड़ियों की जिंदगी से प्रेरित होकर लिखी है। इसमें बताने की कोशिश की गई है कि कैसे एक खिलाड़ी के सामने चुनौती आती है और फिर भी वो आगे बढ़ता है।
फिल्म में विलेन ‘भगवान दास मिश्रा’ की भूमिका निभा रहे जिम्मी शेरगिल कहते हैं कि विलेन होना जरूरी है, जब विलेन होगा तभी तो हीरो बनेगा। फिल्म में सामाजिक संदेश भी देने की कोशिश की गई है।
इस हिंदी फिल्म से डेब्यू कर रहीं अभिनेत्री जोया हुसैन कहती हैं कि फिल्म में लड़कियों के सामने आने वाली चुनौती, उनके आत्मविश्वास, उनके प्रेम के साथ आगे बढ़ने की कहानी है। बता दें कि मुक्काबाज फिल्म 12 जनवरी को रिलीज हो रही है।
अनुराग कश्यप को अचानक जाना पड़ा वापस
फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप को भी संवाद कार्यक्रम में शामिल होना था, वह देहरादून पहुंच भी गए, लेकिन अचानक जरूरी काम से उन्हें मुंबई वापस जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने रिकॉर्डेड मैसेज के साथ देहरादून से अपना पुराना नाता और लगाव बताते हुए कार्यक्रम में शिरकत न कर पाने का मलाल जाताया।
उन्होंने बताया कि उनकी छठी कक्षा तक पढ़ाई दून के हिलग्रेंज स्कूल से हुई है। वह स्कूल में जाकर पुराने दिनों को याद करना चाहते थे, लेकिन मजबूरी में वापस जाना पड़ रहा है।