उत्तराखंड में पंचायत चुनाव समय से होने को लेकर एक बार फिर संशय है।
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हाईकोर्ट से दस दिन की मोहलत मिलने के बाद गुरुवार को शासन की ओर से अधिसूचना जारी होनी थी। देर रात तक इस पर फैसला नहीं हो सका।
सूत्रों के मुताबिक एक बार फिर पंचायत चुनावों को पीछे खिसकाने का रास्ता निकाला जा रहा है। पहले 11 फरवरी को चुनाव आचार संहिता लागू होनी थी।
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प्रदेश सरकार के मुखिया बदलने और विकास कार्य के नाम पर कोर्ट से राहत ले चुनाव आचार संहिता को दस दिन आगे बढ़ा दिया गया। इस हिसाब से 21 फरवरी को चुनाव की आचार संहिता जारी होनी थी।
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इस कार्यक्रम के हिसाब से 20 फरवरी को शासन की ओर से अधिसूचना जारी होनी थी। देर रात तक अधिसूचना जारी नहीं हुई ऐसे में 21 से आचार संहिता लागू होगी कि नहीं इसे लेकर संशय है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुवर्द्धन के मुताबिक शासन की ओर अधिसूचना ही जारी नहीं हुई है। ऐसे में शुक्रवार को आचार संहिता लागू करना मुश्किल होगा। उधर शासन के सूत्रों के मुताबिक इस मामले को लेकर विचार किया जा रहा है।
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बताया जा रहा है कि लोक सभा की आचार संहिता के लागू होने से पहले ही सरकार अपने एजेंडे को अमली जामा पहनाने की कोशिश में है। ऐसे में पंचायत चुनाव की आचार संहिता के कारण भी हाथ बंधने की आशंका है।
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इस स्थिति को देखते हुए ही पंचायत चुनाव को दो-तीन माह पीछे खिसकाने का रास्ता निकाला जा रहा है। हालांकि देर रात तक भी इस मामले को लेकर रास्ता नहीं निकाला जा सका था। कोई रास्ता नहीं निकलता तो अधिसूचना को एक दो दिन तक टालने की कोशिश की जा सकती है।