गत वर्ष दोनों ने जेईई मेन परीक्षा दी थी, जिसमें आकाश ने जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया था, जबकि विकास क्वालिफाई नहीं कर पाया था। दोनों ने एक साथ दोबारा तैयारी करने का फैसला लिया। इस साल दोबारा जेईई मेन-1 परीक्षा दी। इस साल आकाश ने जेईई मेन में 98.77 जबकि विकास ने 98.59 परसेंटाइल स्कोर किया है।
जुड़वां भाइयों के इस परिणाम पर मां मिथलेश वर्मा भी खुश हैं। उनके शिक्षक एवं अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा का कहना है कि दोनों ही भाइयों ने लगन के साथ तैयार की है। वह दो साल से आईआईटी में दाखिले की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस साल निश्चित तौर पर आईआईटी की सीट निकाल लेंगे।
गत वर्ष जेईई मेन परीक्षा में 13 हजार रैंक हासिल कर एनआईटी में सीट मिलने के बाद नवीन ने सीट छोड़ दी। नए सिरे से तैयारी की। जेईई मेन-1 में 99.52 परसेंटाइल स्कोर किया। रेसकोर्स (देहरादून) निवासी नवीन सैनी ने इस साल जेईई मेन में 99.52 परसेंटाइल स्कोर किया है।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष 87 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास करने के बाद उन्होंने जेईई मेन परीक्षा दी थी। इसमें उन्होंने 13 हजार रैंक हासिल की थी। परीक्षा से उन्हें एनआईटी की सीट भी मिल गई थी, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। उनका सपना आईआईटी में जाने का है। इसलिए उन्होंने दोबारा तैयारी की। नवीन ने फिजिक्स में 99.6, केमिस्ट्री में 99.8, मैथ्स में 96.5 परसेंटाइल हासिल की। उनके शिक्षक एवं अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा का कहना है कि नवीन शुरू से मेहनती है।
काउंसिलिंग में एक गलती की वजह से गत वर्ष नरेंद्रनगर निवासी सुशील आईआईटी रुड़की में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिले से वंचित रह गए थे। इसके बावजूद वह हिम्मत नहीं हारे। उन्होंने नए सिरे से एक साल तक तैयारी की। इस बार सुशील ने जेईई मेन-1 में 99.18 परसेंटाइल हासिल की है। उन्होंने फिजिक्स में 99.12, केमिस्ट्री में 99.45, मैथ्स में 97.12 परसेंटाइल स्कोर किया है।
उनके पिता हर्षपति ठेकेदार हैं। मां सुनीता गृहिणी हैं। सुशील का कहना है कि उन्हें इस बात का रंज तो था कि जिस आईआईटी में सिविल इंजीनियरिंग के लिए सबसे ज्यादा मारामारी रहती है, वह उससे वंचित रह गए। लेकिन, दोबारा तैयारी में जुटे हैं। इस बार अच्छे आईआईटी में दाखिला पाएंगे।
ऑनलाइन परीक्षा से खुश नजर आए छात्र
जेईई मेन की परीक्षा पहली बार ऑनलाइन होने की वजह से छात्र खुश नजर आए। उनका कहना है गत वर्षों के मुकाबले इस वर्ष परीक्षा बेहतर रही। परीक्षा में 98.5 परसेंटाइल हासिल करने वाले उज्जवल सैनी का कहना है कि पहले वह ऑनलाइन को लेकर घबराए हुए थे। लेकिन, फिर तैयारी की तो आसानी रही। 99.12 परसेंटाइल हासिल करने वाले अंकुर जैन का कहना है कि गत वर्ष उन्होंने ऑफलाइन परीक्षा दी थी। लेकिन, इस बार ऑनलाइन परीक्षा बेहतर रही। सवाल भी आसान थे। 99.68 परसेंटाइल हासिल करने वाले नितिन कुमार मल्होत्रा का कहना है कि एनटीए की परीक्षा ज्यादा बेहतर रही है।