एफआईआर में दुष्कर्म की बात न लिखाने के सवाल पर पीड़िता ने पुलिस को तर्क दिया था कि लोकलाज के भय से उसने यह बात छुपाई। यह बात वह कोर्ट के सामने बताना चाहती थी। दुष्कर्म का तथ्य सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल संजय कुमार के लिए फौरी राहत की बात यह है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ही उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा था।
गौरतलब है कि भाजपा से ही जुड़ी एक युवती ने प्रदेश भाजपा के महामंत्री (संगठन) संजय कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर सूबे की सियासत को गरमा दिया था। महिला कार्यकर्ता का आरोप था कि संजय कुमार ने उसे अश्लील मैसेज भेजे, छेड़छाड़ की । उसकी लज्जा भी भंग की।
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शिकायत के बाद भी आरोपी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी गई। इसके बाद पीड़िता ने अमर उजाला दफ्तर आकर आपबीती सुनाते हुए साक्ष्य उपलब्ध कराए थे।
अमर उजाला में मामला प्रकाशित होने के बाद मीटू प्रकरण मीडिया की सुर्खियां बन गया। संजय कुमार को संगठन मंत्री के पद से अगले दिन ही हटा दिया गया। एसएसपी ने पीड़िता द्वारा लगाए आरोपों की जांच एसपी देहात को सौंपी थी। एसपी देहात की जांच रिपोर्ट के आधार पर पांच जनवरी को कोतवाली में संजय कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।
पुलिस ने पहले धारा 161 के तहत बयान दर्ज किए और फिर पीड़िता के बयान मजिस्ट्रेट के सामने कराने का निर्णय लिया था। शनिवार को पीड़िता न्यायिक दंडाधिकारी तृतीय की अदालत मेें बयान कराए गए। बता दें कि इस मामले में गिरफ्तारी की आशंका के चलते संजय कुमार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। नैनीताल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को संजय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।