जौनसार बावर क्षेत्र बूढ़ी दिवाली के रंग में रंग गया है। बुधवार को क्षेत्र में भिरुड़ी पर्व की धूम रही। लोगों ने अपने ईष्ट देव की स्तुति कर आशीर्वाद लिया और सबको भिरुड़ी पर्व की शुभकामनाएं दीं। दिनभर पंचायती आंगन में हारुल और तांदी नृत्य की धूम रही।
बुजुर्ग से लेकर बच्चों तक सभी भिरुड़ी पर्व के जश्न में डूबे रहे। बुधवार को जनजातीय क्षेत्र के समाल्टा, कनबुआ, पानुवा, अलसी, सकनी, बिजऊ, कोटी, भुगतार, समाया, बडनू, उत्पाल्टा, उपरोली, कोरुवा, भंजरा, सुरेऊ, चंदेऊ समेत दर्जनों गांव में भिरुड़ी का त्योहार मनाया गया। देर रात तक पंचायती आंगन में नाच-गाने का दौर चलता रहा।
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हाथों में मशाल लेकर किया नृत्य
भिरुड़ी से पूर्व सुबह चार बजे गांव के लोग सामूहिक रूप से भीमल की लकड़ी से बने होलियात को लेकर गांव से कुछ दूर स्थित एक स्थान पर पहुंचे। जहां होलियात जलाने के बाद लोगों ने अपने हाथों में मशाल लेकर नृत्य किया। भिरुड़ी पर्व पर गांव के स्याणा ने ठारी पर चढ़ कर अखरोट फेंके, जिन्हें लोगों ने पकड़ कर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। लोगों ने देवता की पूजा करने के बाद एक-दूसरे को प्रसाद के रूप में चिवड़ा और अखरोट बांटे। बृहस्पतिवार को क्षेत्र में जंदोई पर्व मनाया जाएगा। ----
सूने की हरियाड़ी का विशेष पर्व
भिरुड़ी के दिन सूने की हरियाड़ी का विशेष महत्व है। भिरुड़ी के दिन गांव का बाजगी (ढोल बजाने वाला) 21 दिन पहले जौ और गेहूं को साफ सुधरे स्थान पर बोता है। भिरुड़ी के दिन तैयार हुई हरियाड़ी ईष्ट देवताओं को अर्पित की जाती है। बाद में गांव का बाजगी इस हरियाड़ी को पंचायती आंगन में एकत्रित हुए महिला-पुरुषों के माथे पर लगाता है।