उपनल कर्मचारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा ने बुधवार को तहसील मुख्यालय का घेराव किया। उन्होंने उपनल कर्मचारियों को नियमित करने समेत उनके जीएसटी में कटौती नहीं करने की मांग की। मांग के समर्थन में उन्होंने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी साधना सक्सेना के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी भेजा।
जनसंघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि 12 नवंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए प्रदेश के विभिन्न विभागों में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने, जीएसटी में कटौती न करने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार को यह नागवार गुजरा। मामले में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर दी। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में दिए गए आदेश पर रोक लगा दी। कहा कि बीते 12 साल से ये कर्मचारी विभाग में उपनल के तहत संविदा के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनको बहुत कम मानदेय मिलता है। ये कर्मचारी इस उम्मीद पर इतने कम वेतन में सेवाएं दे रहे हैं कि भविष्य में उन्हें नियमित किया जाएगा लेकिन, सरकार के एलएसपी दायर करने के बाद कर्मचारियों का भविष्य चौपट हो गया है।
तहसील घेराव करने वालों में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, विजयराम शर्मा, डॉ. ओपी पंवार, मौ. असद, मौ. गालिब, विनोद गोस्वामी, प्रवीण शर्मा पीन्नी, ओपी राणा, सुमन प्रधान, सुशील भारद्वाज, अनिल तोमर, जॉनी गुलेरिया, रवि चंदेल, रियासत अली, नंदन सिंह रावत, जयपाल सिंह, इसरार अहमद, भीम सिंह बिष्ट, किशन पासवान, नरेश कुमार, परवेज अली, केपी सक्सेना, रहबर अली, वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, गौर सिंह चौहान, सचिन कुमार, मामराज, जाबिर हसन, केपी सक्सेना, शेर सिंह, वसीम खान, इदरीश, रवि भटनागर, जय देव नेगी, भीम सिंह बिष्ट, विनोद गोस्वामी, निर्मला धीमान आदि शामिल रहे।