बाद में प्रदेश सरकार ने उन्हें विवि से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेजा। हालांकि वह अब भी जेल में हैं। हजारों डिग्रियों के फॉर्मेट पर उनका नाम प्रकाशित होने की वजह से अब वह डिग्रियां बेकार हो गई हैं। लेकिन विवि एक साल से डिग्री का नया फॉर्मेट नहीं छपवा पा रहा है। विवि की इस लापरवाही से हजारों छात्र-छात्राएं परेशान हैं।
नियमानुसार डिग्री पर केवल कुलसचिव लिखा होता है। उनका नाम नहीं होता। लेकिन, पूर्व कुलसचिव का नाम प्रकाशित होने की वजह से हम छात्रों को डिग्री नहीं दे पा रहे हैं। जल्द नई डिग्री के फॉर्मेट छपवाए जाएंगे।
-सुरेश चौबे, एग्जाम कंट्रोलर, आयुर्वेद विवि