उत्तराखंड की संस्कृति में जागर के माध्यम से देवताओं का आह्न करने वाले डंगरियों व जगरियों को अब सरकार प्रति माह पेंशन देगी।
मुख्यमंत्री हरीश रावत की घोषणा पर अमल करते हुए जिला समाज कल्याण विभाग ने खंड विकास अधिकारी को ब्लॉक स्तर पर डंगरियों व जगरियों की सूची तैयार करने के लिए निर्देशित किया है। जिसके तहत उन्हें प्रति माह एक हजार रुपए दिए जाएंगे।
देव भूमि उत्तराखंड में शुभ कार्यों और दुख-तकलीफ दोनों मौकों पर घर में स्थापित ईष्ट देवता का आह्वान करने की प्राचीन परंपरा रही है। शुभ कार्यों के बाद ईष्ट देव को बधाई देने के लिये जागर लगाया जाता है तो दुख तकलीफ में कष्टों का निवारण कराने के लिये आह्वान किया जाता है।
उत्तराखंड के हर घर, परिवार में ईष्ट देव स्थापित हैं। लेकिन जागर लगाने वाले और जागर में जगरिये द्वारा देवता के रूप में नचाए जाने वाले डंगरिये अलग होते हैं। जागर में ढोल या हुड़के की थाप पर संबंधित देवता को लेकर लोक कथाओं का बखान होता है। जिसे सुनने के बाद डंगरिये नाचते हुए जागर स्थली में आते हैं।