प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील उत्तराखंड राज्य के लिए आपदा प्रबंधन में इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) का रिलीफ मैनेजमेंट मोबाइल एप्लीकेशन मददगार साबित हो सकता है। राज्य सचिवालय में बुधवार को एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को इस मोबाइल एप्लीकेशन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई।
इसरो के प्रबंधक डॉ. के.रमा मोहन राव ने बताया कि एप्लीकेशन में बहुत सारे ऐसे फीचर हैं, जिनकी मदद से प्रभावित आपदा की स्थिति में मदद प्राप्त कर सकते हैं। एप्लीकेशन इसरो के नेशनल डेटाबेस फॉर इमरजेंसी मैनेजमेंट के जियो स्पेशल (भूस्थानिक) पोर्टल से जुड़ा है।
बकौल राव,‘ एप्लीकेशन के माध्यम से घटनाओं के संदेश और वीडियो भेजने की सुविधा है। उसमें भौगोलिक सूचकों के माध्यम से निकटतम अस्पताल, एसडीआरएफ, पुलिस स्टेशन, पेट्रोल पंप और जन सुविधाओं से संबंधित वे तमाम संस्थान जो आपदा के समय मददगार हो सकते हैं, उनकी लोकेशन जानकर उन्हें सूचनाएं प्रेषित की जा सकती है और उनसे मदद ली जा सकती है।’
डॉ. राव के मुताबिक, देश के कई राज्यों में रिलीफ मैनेजमेंट एप्लीकेशन का इस्तेमाल हो रहा है और इसके बहुत अच्छे परिणाम सामने आए हैं। आरंभ में यह एप्लीकेशन सरकारी अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी, लेकिन इसरो और आपदा प्रबंधन विभाग की मंशा इसे आम जन तक पहुंचाने की है, क्योंकि आपदा की स्थिति में सबसे पहले रिस्पांस उसी को करना होता है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अगले चरण में इसे तहसील और पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा।
अब पांच दिवसीय कार्यशाला होगी
सचिव अमित सिंह नेगी ने बताया कि एप्लीकेशन की जानकारी के लिए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन के सहयोग से प्रदेश के आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों, जीआईएस विशेषज्ञों और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी की पांच दिवसीय ट्रेनिंग कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इंडियन इंस्टीटयूट के साथ एक एमओयू भी होगा।